भाजपा का संगठन परिवर्तन कभी भी, मंत्रिमंडल विस्तार बाद में

Update: 2026-06-28 05:54 GMT

योगी आदित्यनाथ को पार्लियामेंट बोर्ड का सदस्य बनाया जा सकते है

भाजपा संगठन में युवा नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी

नितिन नवीन की नई टीम तैयार, आज-कल में ऐलान

विदेश दौरे से लौटने के बाद पीएम मोदी कैबिनेट में फेरबदल भी जल्द

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम सभी केंद्रीय मंत्रियों के परफॉर्मेंस और उनके द्वारा किए गए कार्य की समीक्षा संपूर्ण कर ली गई है और उसी के आधार पर देश हित  और पार्टी के हित में देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम बहुत जल्द होने वाला है..

विस्तार का प्रमुख कारण आगामी चुनाव और आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए एवं संगठन में फेरबदल उपरांत कार्य की समीक्षा के आधार पर किया जाएंगे

नई दिल्ली/रायपुर (जसेरि)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटते ही केन्द्रीय मंत्रीमंडल और भाजपा संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। ऐसा हुआ तो यह पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल के बाद मंत्रीमंडल में पहला फेरबदल होगा। वहीं नीतिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से भाजपा के केन्द्रीय संगठन में नियुक्तियों का मामला भी अटका हुआ है जिसे अब अमलीजामा पहनाया जाएगा। जानकारी के अनुसार केन्द3ीय मंत्रीमंडल मं कम से कम 24 केंद्रीय मंत्रियों के प्रभार में फेरबदल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ मंत्री हटाए और कुछ नए मंत्री भी बनाए जा सकते हैं। इनमें भाजपा में हाल ही में शामिल आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों में किसी को मंत्री बनाया जा सकता है, वहीं टीएमसी और शिवसेना उद्धव गुट से टूटकर शिवसेना शिंदे में शामिल सांसदों में से भी कुछ को मंत्रीमंडल में शामिल किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी, हरदीप सिंह पुरी धर्मेंद्र प्रधान, नितिन गडकरी, अर्जुन राम मेघवाल को मंत्रीमंडल से अलग बड़ी जिम्मेदारी मिलने की भी संभावना है। कुछ राज्यों में राज्यपाल भी बदले जा सकते हैं, कुछ मंत्रियों को इसका दायित्व दिया जा सकता है। निर्मला सीतारमन का विभाग बदलकर पीयूष गोयल, अश्वनी वैष्णव या आरबीआई के पूर्व गवर्नर शशिकांत दास जो प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी रह चुके को वित्तमंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम सभी केंद्रीय मंत्रियों के परफॉर्मेंस और उनके कार्यों की समीक्षा पहले ही पूरा कर चुके हैं, विदेश दौरे से लौटते ही अब मंत्रीमंडल में फेरबदल होगा और उसके बाद संगठन में नई नियुक्तियां भी होंगी।

दो राज्यों में बदल सकते हैं मुख्यमंत्री : इस बीच यह चर्चा भी तेज है कि संगठन और विधायकों की मांग पर मध्यप्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्री बदले जा सकते हैं। इसके साथ ही भाजपा शासित कई राज्यों में भी मंत्रीमंडल में फेरबदल कर नए विधायकों को मंत्री बनाए जा सकते हैं। राज्य सरकारों को ज्यादा जवाबदेह बनाने के साथ लोगों का विश्वास हासिल करने के लिए भाजपा यह फैसला ले सकती है।

जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे से बढ़ी अटकलें : जॉर्ज कुरियन मोदी मंत्रिपरिषद में शामिल एकमात्र ईसाई मंत्री थे। वह केरल में भाजपा के पुराने नेताओं में गिने जाते हैं और पार्टी की शुरुआती दौर से ही सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। हालांकि वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे। उनके इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।

मोदी सरकार के नए मंत्रियों की संभावित लिस्ट : मोदी सरकार में फेरबदल की चर्चा के बीच मंत्रियों के बदलावों की एक संभावित लिस्ट सामने आई है। संभावना है कि कैबिनेट में यह फेरबदल रविवार या सोमवार को हो सकता है। इस हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर गृहमंत्री अमित शाह जिस तरह से बारी-बारी से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले हैं, उसके बाद तत्काल कैबिनेट फेरबदल को अवश्यंभावी माना जा रहा है। सूत्रों के हवाले से जो लिस्ट मिली है, उसमें कैबिनेट फेरबदल के लिए कुछ चौंकाने वाले नाम हैं। जैसे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर शक्तिकांता दास का नाम सबसे अप्रत्याशित है। इसी तरह से कुछ और बड़े नाम हैं, जो अभी तो कैबिनेट में हैं, लेकिन हो सकता है कि अगले एक-दो दिन में वे सरकार से बाहर होते नजर आएं।

पश्चिम बंगाल को मिल सकता है ज्यादा प्रतिनिधित्व : हालिया राजनीतिक परिस्थितियों के बाद पश्चिम बंगाल को केंद्र सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा वहां से किसी नए चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्य का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को लेकर भी चर्चा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने वाला है। दोनों को दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा या नहीं, इस पर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा जारी है।

पंजाब और महाराष्ट्र के समीकरण भी अहम : पंजाब में भाजपा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से राज्य को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं महाराष्ट्र में सहयोगी दलों और बदलते राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

राज्यपाल और राजदूत नियुक्तियों की भी चर्चा : कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के राज्यपालों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का कार्यकाल भी पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे में चर्चाएं हैं कि मंत्रिमंडल से बाहर होने वाले कुछ नेताओं को राज्यपाल या राजदूत जैसी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

कैबिनेट में शामिल होने वाले संभावित मंत्रियों के नाम : मोदी कैबिनेट में फेरबदल के बाद जिन नए नामों को शामिल किए जाने की चर्चा है, वे हैं-

शक्तिकांता दास- प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और पूर्व आरबीआई गवर्नर। संभावित है कि ये मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल हो सकते हैं और वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभाल सकते हैं।

श्रीकांत शिंदे (शिवसेना)- इन्हें भी कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों को एनडीए में लाने का इनाम मिल सकता है।

अनुराग ठाकुर (हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से बीजेपी सांसद)- फिर से कैबिनेट में वापसी संभावित है।

अरुण गोविल (मेरठ से बीजेपी सांसद)- दूरदर्शन के प्रभु राम को भी मंत्री के रूप में सत्ता का सुख मिल सकता है।

राघव चड्ढा या अशोक मित्तल (आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए)- इन दोनों से किसी एक की लॉटरी लग सकती है।

नीतीश कुमार (बिहार के पूर्व सीएम)- जेडीयू चीफ को भी पीएम मोदी अपनी कैबिनेट में ले सकते हैं।

संजय दीना पाटिल (6 सांसदों के साथ शिवसेना-यूबीटी से निकलने वाले)- मंत्री बनाए जा सकते हैं।

विष्णुदत्त शर्मा (खजुराहो से बीजेपी एमपी)- इन्हें भी मोदी सरकार में जगह दी जा सकती है।

तरुण चुग- बीजेपी के वरिष्ठ नेता और आरएसएस के स्ट्रॉन्गमैन को भी इस बार सत्ता का स्वाद चखने का अवसर दिया जा सकता है। अभी तक इन्होंने संगठन की जिम्मेदारी बखूबी संभाली है।

जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (बिहार के महाराजगंज से बीजेपी एमपी)- इनके भी सरकार में शामिल किए जाने की संभावना है।

कैबिनेट मंत्री जिनका बदल सकता है मंत्रालय

निर्मला सीतारमण- वित्त मंत्रालय से शिक्षा मंत्रालय में भेजे जाने की संभावना है।

मनोहर लाल खट्टर- ऊर्जा मंत्रालय का पदभार वापस लिया जा सकता है। किसी नए मंत्री को दी जा सकती है यह जिम्मेदारी। हालांकि, शहरी विकास मंत्रालय उनके पास बना रह सकता है।

मोदी सरकार के मंत्री, जिनकी हो सकती है छुट्टी

धर्मेंद्र प्रधान- शिक्षा मंत्री। जिन मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, उनमें सबसे चर्चित नाम हैं।

हरदीप सिंह पुरी- पेट्रोलियम मंत्री के भी कैबिनेट से बाहर होने की अटकलें हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू- अभी रेलवे और फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय में राज्यमंत्री हैं। लेकिन, राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने को है और ऊपरी सदन में एंट्री नहीं मिली है, इससे लगता है कि इन्हें भी कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इनके अलावा करीब आधे दर्जन राज्यमंत्री हैं, जिन्हें सरकार से हटाए जाने की चर्चा है।

टीम नितिन नवीन तैयार! बीजेपी संगठन में भी बड़े बदलाव के संकेत

भाजपा अध्यक्ष नीतिन नवीन संगठन के विस्तार और नई टीम को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं। ऐसे में कुछ नेताओं को सरकार से संगठन में भेजे जाने और कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है। भाजपा में 75 वर्ष से अधिक आयु वाले नेताओं को लेकर लंबे समय से एक अनौपचारिक राजनीतिक परंपरा की चर्चा होती रही है। ऐसे में कुछ वरिष्ठ नेताओं के स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए भी बदलाव की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व के हाथ में होगा।

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई संगठनात्मक टीम लगभग तैयार है। माना जा रहा है कि इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी बड़ा फेरबदल हो सकता है। उत्तर प्रदेश में नए संगठन की घोषणा के बाद राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। चर्चा है कि इस बार केन्द्रीय संसदीय समिति में योगी आदित्य नाथ को शामिल कर संगठन में भी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस बारे में बीजेपी सूत्रों ने पहले ही संकेत दिए थे कि संगठन में बड़े बदलाव जून के आखिर तक हो सकते हैं, साथ ही ये बदलाव केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल से जुड़े हो सकते हैं।

गुरुवार को नितिन नबीन की कुछ राज्य मंत्रियों के साथ बातचीत के बाद फेरबदल की अटकलें और तेज हो गईं।

उत्तर प्रदेश की नई टीम में युवाओं और विभिन्न पिछड़ा वर्ग जातियों के प्रतिनिधित्व पर ध्यान गया है। इसे समाजवादी पार्टी की पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक समीकरण का जवाब माना जा रहा है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन में भी इसी तरह युवाओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। क्योंकि पार्टी युवाओं और महिलाओं के अलावा अहम जाति समूहों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है।

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