81 साल के पिता की सूझबूझ ने फेल किया 'डिजिटल अरेस्ट' का दांव, ठगों के चंगुल से ऐसे बचाए 12 लाख रुपये
जानें पूरा मामला.
नई दिल्ली: साइबर ठगी से बचाने का एक केस सामने आया है, जहां 81 साल के बुजुर्ग पिता ने सूझ-बूझ का बड़ा उदाहरण दिया है. उन्होंने समझदारी दिखाते हुए अपने ही बेटे और पुत्र वधु को डिजिटल अरेस्ट होने से बाल-बाल बचा लिया है. यह मामला पुणे का है.
पेशे से केमिकल इंजीनियर बेटे को एक दिन पहले एक अनजान नंबर से कॉल आया है. इसके बाद वे 12 लाख रुपये गंवाते-गंवाते बचे हैं. विक्टिम ने इसको लेकर एक कंप्लेंट भी दर्ज की है. विक्टिम ने पुलिस कंप्लेंट में बताया है कि 19 अप्रैल को करीब सुबह 11 बजे उनको एक कॉल आया. विक्टिम को ये कॉल वॉट्सऐप पर रिसीव हुई थी. कॉलर ने बताया है कि वह मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के ऑफिसर हैं, जो असल में एक साइबर ठग था.
साइबर ठग ने विक्टिम को बताया है कि उनके नाम से एक पार्सल मिला है, जिसको अथॉरिटी ने जब्त कर दिया है. पार्सल के अंदर 5 पासपोर्ट, ड्रग्स पाया गया है, जिसके बाद विक्टिम ने बताया है कि ये उनका पार्सल नहीं है.
फिर विक्टिम पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिसके बाद सीनियर ऑफिसर के द्वारा एक हाई लेवल इनक्वायरी का सामने करने को कहा. फिर साइबर क्रिमिनल्स ने विक्टिम और उनकी पत्नी पर दबाव बनाया कि वह सिग्नल मैसेजिंग ऐप इंस्टॉल करें. इसके बाद वीडियो कॉल जॉइन करने को कहा.
वीडियो कॉल पर एक आदमी पुलिस यूनिफॉर्म में नजर आ रहा था. उसने खुद को इनवेस्टीगेशन ऑफिसर बताया. इसके बाद विक्टिम दंपत्ती पर गंभीर आरोप लगाए गए और इस मामले के बारे में किसी और को ना बताने की सलाह दी गई. दोनों को घर पर ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है.
देर रात तक दोनों को तरह-तरह के आरोप लगाकर परेशान किया गया. इसके बाद विक्टिम से उनका आधार कार्ड और बैंक डिटेल्स मांगी गई. इसके बाद विक्टिम को बताया गया है कि अगर वह 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर देंगे तो केस में से उनका नाम हटा दिया जाएगा.
डिजिटल अरेस्ट के दौरान बेटा परेशान सा नजर आता है. इसके बाद पिता ने बेटे से पूछा और फिर डिजिटल अरेस्ट का भंडाफोड़ हो गया. विक्टिम ने तुरंत पुलिस को पूरे मामले की जानकारी और कंप्लेंट दर्ज कराई.