पानी की किल्लत के बीच इंदौर में ‘पानी का खेल’, अवैध सप्लाई करते नगर निगम के 2 टैंकर जब्त, ₹1 लाख जुर्माना
Indore. इंदौर | इंदौर में एक तरफ जहां आम जनता पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम से अनुबंधित टैंकरों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर होटल और हॉस्टल में अवैध रूप से पानी सप्लाई करने का मामला सामने आया है। इस गंभीर लापरवाही और अनियमितता पर नगर निगम ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो टैंकर जब्त किए हैं और संबंधित फर्मों पर कुल ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
पूरा मामला तब सामने आया जब नगर निगम की निगरानी टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में जल आपूर्ति व्यवस्था की जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियां पकड़ीं। जांच में पाया गया कि नगर निगम से अनुबंधित दो अलग-अलग फर्मों के टैंकर निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर निजी संस्थानों में पानी की सप्लाई कर रहे थे।
पहला मामला आशा इंटरप्राइजेस नामक फर्म से जुड़ा पाया गया, जिसका एक टैंकर रतनलोक कॉलोनी स्थित एक होटल में पानी पहुंचा रहा था। वहीं दूसरी घटना में कैपी कंस्ट्रक्शन फर्म का टैंकर भाग्यश्री कॉलोनी स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में अवैध रूप से पानी सप्लाई करता हुआ पकड़ा गया। जांच में दोनों शिकायतें सही पाई गईं, जिसके बाद मौके पर ही कार्रवाई की गई।
नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने दोनों फर्मों पर ₹50-50 हजार का जुर्माना लगाने के आदेश जारी किए। साथ ही संबंधित टैंकरों को जब्त कर लिया गया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस पूरे मामले ने शहर में जल वितरण व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि जिस समय शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है, उसी दौरान अनुबंधित टैंकरों का निजी संस्थानों में उपयोग होना गंभीर अनियमितता माना जा रहा है।
निगमायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नगर निगम के अनुबंधित जल टैंकरों का उपयोग केवल निर्धारित क्षेत्रों और अधिकृत कार्यों के लिए ही किया जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी भी टैंकर का उपयोग निजी प्रतिष्ठानों, होटलों, हॉस्टलों या अन्य अनधिकृत स्थानों पर पाया गया तो संबंधित फर्म और जिम्मेदार व्यक्तियों पर और भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अन्य टैंकर संचालकों में भी हड़कंप मच गया है। विभाग अब जल आपूर्ति व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखने की तैयारी में है ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि शहरी जल व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्त निगरानी कितनी जरूरी है, ताकि जनता के हक का पानी सही तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंच सके और किसी भी स्तर पर उसका दुरुपयोग न हो।