Palamuru की पिछड़ापन स्वीकार, जुपल्ली कृष्ण राव ने पलायन और सूखे पर जताई चिंता
Hyderabad: तेलंगाना में पलामुरु क्षेत्र के विकास और पिछड़ेपन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। राज्य के एक्साइज मंत्री Jupally Krishna Rao ने माना है कि संयुक्त आंध्र प्रदेश के दौरान पलामुरु क्षेत्र लगातार पिछड़ा रहा और इसे विकास योजनाओं में पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली।
Jupally Krishna Rao ने विभिन्न सरकारों पर पलामुरु क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि लंबे समय तक यह इलाका बुनियादी सुविधाओं और सिंचाई संसाधनों की कमी से जूझता रहा है। उन्होंने क्षेत्र में सूखा, बेरोजगारी और बड़े पैमाने पर पलायन को प्रमुख समस्या बताया।
मंत्री ने कहा कि पलामुरु क्षेत्र में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के बावजूद लगातार जल संकट ने किसानों की स्थिति को कमजोर किया है। इसके कारण बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए हैं।
Jupally Krishna Rao ने यह भी स्वीकार किया कि क्षेत्र में आत्महत्या की घटनाएं भी चिंता का विषय रही हैं, जो आर्थिक और सामाजिक दबाव का परिणाम हैं।
इसी बीच, उन्होंने गोलापल्ली रिज़र्वॉयर प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व सरकार के कार्यों का बचाव भी किया। उनका कहना है कि इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए गए थे, जिससे कृषि विकास को गति मिल सके।
मंत्री के अनुसार, जल संसाधन परियोजनाएं पलामुरु जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा के समान हैं, और इन परियोजनाओं का उद्देश्य किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा प्रदान करना है।
Jupally Krishna Rao ने कहा कि वर्तमान सरकार भी क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दे रही है और सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्री का यह बयान राज्य में क्षेत्रीय विकास असमानताओं को फिर से चर्चा में लाता है। पलामुरु को लंबे समय से पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता रहा है और यह मुद्दा हर चुनाव में उठता रहा है।
स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं के बावजूद अभी भी कई गांवों में पानी और रोजगार की समस्या बनी हुई है। इस कारण युवाओं का पलायन आज भी जारी है।
Jupally Krishna Rao के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है और सरकार से पलामुरु क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग की है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में पलामुरु के विकास को लेकर नई नीतिगत घोषणाओं की संभावना जताई जा रही है।