केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राहुल गांधी के बीच तीखी बहस शुरू

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Update: 2025-12-10 12:13 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को चुनाव सुधार और SIR (सर्वे ऑफ इंडियन रेसिडेंट) को लेकर विपक्ष पर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता चर्चा से कभी नहीं भागते, लेकिन विपक्ष SIR के मुद्दे पर लगातार झूठ फैला रहा है और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। शाह ने बताया कि चुनाव सुधार पर काम करने के बजाय विपक्ष लगातार SIR पर ध्यान दे रहा है और पिछले चार महीनों से केवल झूठी खबरें फैला रहा है।
अमित शाह ने SIR के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पहले भी हुई है। उन्होंने कहा कि SIR तीन बार नेहरू सरकार और एक-एक बार इंदिरा गांधी व अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में किया गया। तब किसी राजनीतिक दल ने इसका विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव सुधारों के पक्ष में रही है, लेकिन विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए विवाद खड़ा कर रहा है।



SIR पर बहस के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमित शाह को चुनौती दी। राहुल ने कहा कि शाह जी मेरी वोट चोरी से जुड़ी तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा करें। इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि वे तय करेंगे कि कैसे जवाब देना है और अपने भाषण की रूपरेखा स्वयं तय करेंगे। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष उन्हें उकसा नहीं सकता और वे केवल विषय पर ही बोलेंगे। राहुल गांधी ने अमित शाह के बयान को घबराया हुआ और डर से भरा जवाब बताया। शाह ने कहा कि उनका उत्तर संतुलित और तथ्य पर आधारित होगा, और वे विपक्ष के उकसावे में नहीं आएंगे।
चर्चा की शुरुआत कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने की। उन्होंने कहा कि SIR देश के 12 राज्यों में चल रहा है, लेकिन यह गैरकानूनी है क्योंकि संविधान में पूरे राज्य में एक साथ SIR लागू करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने सरकार से तुरंत इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की।
इस बहस के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी SIR पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और चुनाव आयोग SIR के बहाने NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) की तैयारी कर रहे हैं, जो देश के नागरिकों के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि इसे रोकना जरूरी है ताकि किसी भी नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े।
अमित शाह ने विपक्ष की इन बातों को खारिज करते हुए कहा कि SIR केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे चुनाव सुधार के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा हमेशा देश हित में कार्य करती रही है और विपक्ष के झूठे दावे जनता को भ्रमित करने की कोशिश हैं।
इस बहस में मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। शाह ने अपने भाषण में कई बार विपक्ष के आरोपों का प्रतिवाद किया और कहा कि वे केवल तथ्य और प्रक्रिया पर ही ध्यान देंगे। वहीं राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता लगातार SIR और NRC को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि SIR पर विपक्ष की राजनीति से उन्हें विचलित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सबकी बात सुनी जाएगी, लेकिन निर्णय तथ्यों और संविधान के अनुसार लिया जाएगा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे तथ्यों को समझें और विपक्ष के भ्रम फैलाने वाले दावों से प्रभावित न हों।
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