21 सांसदों ने राज्यपाल को लिखा पत्र

विश्वविद्यालयों में 'तमिऴ थाई वाझ्थु' की परंपरा बहाल करने की मांग

Update: 2026-08-05 17:23 GMT
Tamil Nadu तमिलनाडु: 21 सांसदों ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों और सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में 'तमिऴ थाई वाझ्थु' प्रस्तुत करने की परंपरा को फिर से लागू करने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि यह राज्य की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है और इसे बनाए रखना आवश्यक है।
पत्र में सांसदों ने राज्यपाल से आग्रह किया कि सभी विश्वविद्यालयों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि प्रत्येक दीक्षांत समारोह और आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत 'तमिऴ थाई वाझ्थु' से ही हो। उनका कहना है कि इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का सम्मान होगा।



सांसदों ने यह भी कहा कि यदि इस परंपरा का पालन सुनिश्चित किया जाता है, तो भविष्य में इस विषय पर किसी प्रकार के विवाद से भी बचा जा सकेगा। उनके अनुसार, यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रतीक है।
'तमिऴ थाई वाझ्थु' तमिलनाडु का पारंपरिक राज्य गीत माना जाता है और वर्षों से कई सरकारी तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत इसी के साथ होती रही है। हाल के समय में कुछ आयोजनों में इसे लेकर उठे विवादों के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का रूप ले लिया है।
फिलहाल राज्यपाल कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि विश्वविद्यालयों के लिए इस संबंध में कोई नया निर्देश जारी किया जाएगा या नहीं। हालांकि, सांसदों ने उम्मीद जताई है कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
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