West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को भारी मतदान दर्ज किया गया। 152 विधानसभा सीटों पर हुए इस चरण में कुल 3.60 करोड़ मतदाताओं में से 92.88 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो एक रिकॉर्ड स्तर का मतदान माना जा रहा है। मतदान को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला और कई क्षेत्रों में सुबह से ही लंबी कतारें लग गईं।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में 16 जिलों में फैले निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इसमें 1.75 करोड़ महिला मतदाताओं में से 92 प्रतिशत से अधिक और 1.84 करोड़ पुरुष मतदाताओं में से 90 प्रतिशत से अधिक ने वोट डाला। महिलाओं और पुरुषों दोनों की भागीदारी इस बार काफी अधिक रही, जिससे मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि, मतदान प्रक्रिया के दौरान कुछ स्थानों पर तनाव और घटनाएं भी सामने आईं। कई सीटों पर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और उम्मीदवारों पर हमले की खबरें मिलीं, जिससे कुछ इलाकों में माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर स्थिति को नियंत्रित किया और मतदान प्रक्रिया को जारी रखा।
इसके अलावा, राज्य में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया। जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, जिसके कारण कई लोग मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सके। इससे कुछ वर्गों में असंतोष भी देखा गया।
चुनाव के दौरान गर्मी के कारण भी कुछ घटनाएं सामने आईं। बीरभूम, मालदा, पूर्व मेदिनीपुर और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों में मतदान केंद्रों पर लंबी कतारों में खड़े रहने के दौरान कम से कम चार लोगों की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इन घटनाओं ने मतदान प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े किए।
इसी बीच, चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई करते हुए पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पिंगला विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ के सभी पोलिंग कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। उन पर आरोप था कि उन्होंने मतदान के दौरान पोलिंग स्टेशन को छोड़ दिया था, जिससे व्यवस्था प्रभावित हुई।
कुल मिलाकर पहले चरण का मतदान जहां एक ओर रिकॉर्ड भागीदारी के लिए चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर कुछ घटनाओं और विवादों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित भी किया। अब सभी की नजरें आगामी चरणों के मतदान और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।