West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल सरकार ने शनिवार को पुलिस वेलफेयर बोर्ड को भंग करने का फैसला लिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पुलिस कर्मियों पर किसी भी प्रकार के हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने प्रशासन और पुलिसिंग को लेकर अपनी सरकार की नीति स्पष्ट करते हुए कहा, “पहले शासकों का कानून चलता था, अब कानून का राज है।” उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य हर स्तर पर कानून व्यवस्था को मजबूत करना है।
पुलिस वेलफेयर बोर्ड को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बोर्ड मूल रूप से पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए बनाया गया था, लेकिन समय के साथ यह अपने उद्देश्य से भटक गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह धीरे-धीरे एक राजनीतिक फ्रंटल संगठन जैसा बन गया।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि इस बोर्ड से पुलिस कर्मियों के कल्याण में कितना लाभ हुआ, लेकिन कुछ मामलों में इसके माध्यम से अनुचित लाभ उठाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों को व्यक्तिगत रूप से इसका फायदा मिला है।
इसी कारण राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि पुलिस वेलफेयर बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए, ताकि प्रशासनिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।
सरकार के इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सुधारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल सरकार का कहना है कि आने वाले समय में पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए वैकल्पिक और अधिक पारदर्शी व्यवस्था तैयार की जाएगी।