अंडे के मुद्दे पर TMC एकजुट

Update: 2026-06-25 09:56 GMT

पश्चिम बंगाल: कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मिड डे मील को लेकर शुरू हुई ‘डाइट पॉलिटिक्स’ ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। सरकार के प्रस्ताव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मौजूद दोनों गुट एक ही मंच पर आ गए हैं और अंडे को मिड डे मील से हटाने की आशंका पर विरोध जता रहे हैं।

मामला तब चर्चा में आया जब राज्य सरकार ने कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में मिड डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन को देने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही प्रति थाली भोजन की लागत 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये किए जाने की बात भी सामने आई। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि इस्कॉन द्वारा तैयार किया जाने वाला भोजन पूरी तरह शाकाहारी हो सकता है, जिससे अंडे को मिड डे मील से हटाया जा सकता है।

इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के भीतर अलग-अलग गुटों के नेता एक साथ आ गए हैं। विपक्षी नेता रितब्रत बनर्जी ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि अंडा बच्चों के लिए प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है और इसे हटाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल की परंपरा में मांसाहार और अंडा सामान्य भोजन का हिस्सा रहा है।

वहीं तृणमूल के ही नेता कुणाल घोष और डेरेक ओ ब्रायन ने भी मिड डे मील से अंडा हटाने की संभावित योजना पर सवाल उठाए हैं। सभी का कहना है कि इससे बच्चों के पोषण पर असर पड़ सकता है।

सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, इस्कॉन को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि इस्कॉन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अभी मैन्यू तय नहीं हुआ है और विशेषज्ञों की मदद से स्थानीय भोजन की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही योजना बनाई जाएगी।

इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो मेन्यू वायरल हो रहा है, वह आधिकारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि संगठन पहले से कई राज्यों में मिड डे मील योजना चला रहा है और सभी जगह स्थानीय जरूरतों के अनुसार भोजन दिया जाता है।

इस बीच राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्ष इसे पोषण नीति से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार और इस्कॉन का कहना है कि अंतिम निर्णय वैज्ञानिक और स्थानीय जरूरतों के आधार पर लिया जाएगा।

फिलहाल मिड डे मील में अंडा शामिल रहेगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय का इंतजार है, लेकिन इस मुद्दे ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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