कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागन सर्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के बाद अब पुरस्कार वितरण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को राज्य की भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या दुर्गा पूजा पंडालों को सम्मानित करते समय श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बजाय भव्य सजावट और आकर्षक प्रदर्शन को प्राथमिकता दी गई थी।
दरअसल, पश्चिम बंगाल के सूचना एवं संस्कृति विभाग ने कोलकाता नगर निगम के सहयोग से चोरबागन सर्वजनीन दुर्गोत्सव समिति को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित 'सेरार सेरा-3' (बेस्ट ऑफ द बेस्ट) देवी दुर्गा सम्मान प्रदान किया था। लेकिन इसी पंडाल में शनिवार शाम हुई भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की जान चली गई और 25 अन्य घायल हो गए। इस घटना के बाद पुरस्कार चयन की प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
पुरस्कार मिलने के बाद पंडाल में हुआ दर्दनाक हादसा
चोरबागन सर्वजनीन दुर्गोत्सव समिति का पंडाल इस वर्ष अपनी भव्य सजावट और आकर्षक थीम के कारण चर्चा में था।
राज्य सरकार की ओर से आयोजित देवी दुर्गा सम्मान 2026 में इस पंडाल को सर्वश्रेष्ठ पूजा आयोजनों की श्रेणी में शामिल किया गया था।
समिति को 'सेरार सेरा-3' पुरस्कार के अलावा सर्वश्रेष्ठ प्रकाश व्यवस्था, सर्वश्रेष्ठ पंडाल और पर्यावरण अनुकूल पूजा से संबंधित सम्मान भी मिलने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, पुरस्कार मिलने के बाद शनिवार को सप्तमी के अवसर पर पंडाल में भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई।
इस हादसे ने आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।
TMC ने पूछा- सजावट बड़ी या श्रद्धालुओं की सुरक्षा?
तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राज्य सरकार को घेरते हुए पुरस्कार चयन के आधार पर सवाल उठाए।
पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं पंडाल की थीम और कम रोशनी को श्रद्धालुओं की परेशानी के कारणों में शामिल किया था।
इसके बावजूद उसी पंडाल को सर्वश्रेष्ठ प्रकाश व्यवस्था और सर्वश्रेष्ठ पंडाल जैसे पुरस्कार दिए गए।
TMC ने सवाल किया कि आखिर पुरस्कार देते समय किन मानकों का मूल्यांकन किया गया था।
पार्टी का कहना है कि किसी पूजा आयोजन की सफलता केवल सजावट और आकर्षक प्रस्तुति के आधार पर नहीं मापी जानी चाहिए, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत
उत्तरी कोलकाता के चोरबागन स्थित पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम भारी भीड़ जमा थी।
इसी दौरान अचानक भगदड़ मच गई और बड़ी संख्या में लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।
हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 25 लोग घायल हुए।
घटना के बाद घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर थी।
हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
संकरी गलियों और एक निकास द्वार पर सवाल
प्रारंभिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में सामने आया है कि पंडाल तक पहुंचने वाले रास्ते काफी संकरे थे।
भीड़ के निकलने के लिए पर्याप्त निकास मार्ग उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, पंडाल परिसर से बाहर निकलने के लिए मुख्य रूप से एक ही निकास द्वार का उपयोग हो रहा था।
शनिवार शाम अचानक बारिश होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ सुरक्षित स्थान की ओर बढ़ने लगे।
इसी दौरान भीड़ का दबाव बढ़ गया।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित स्वयंसेवक और पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे।
गलत घोषणा से फैली घबराहट?
हादसे के कारणों को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी यह भी सामने आई है कि पंडाल का ढांचा गिरने की आशंका से संबंधित घोषणा की गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, इस घोषणा के बाद श्रद्धालुओं में घबराहट फैल गई और लोग तेजी से बाहर निकलने लगे।
संकरे रास्तों और अत्यधिक भीड़ के कारण स्थिति गंभीर हो गई।
हालांकि, इस घोषणा की वास्तविक परिस्थितियों और भगदड़ में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
घटना के पीछे किस स्तर पर लापरवाही हुई, इसका अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
सात लोगों को किया गया गिरफ्तार
चोरबागन भगदड़ मामले में कोलकाता पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार लोगों में पूजा आयोजन समिति के पदाधिकारी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति शामिल बताए गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गैर-इरादतन हत्या से संबंधित धाराओं सहित अन्य प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच में आयोजन की अनुमति, प्रवेश और निकास मार्ग, भीड़ प्रबंधन तथा सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती की समीक्षा की जा रही है।
हालांकि, गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिए जांच के निर्देश
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने पूजा आयोजकों से पंडालों में पर्याप्त रोशनी और प्रवेश-निकास की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से थीम आधारित पूजा पंडालों में कम रोशनी की समस्या पर चिंता जताई।
उनका कहना है कि आकर्षक सजावट के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों और पूजा समितियों से सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
उच्चस्तरीय समिति ने शुरू किया निरीक्षण
हादसे के बाद राज्य सरकार ने प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
इस समिति में आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव राजेश कुमार सिंह, अग्निशमन सेवाओं के महानिदेशक अनुज शर्मा और एसटीएफ महानिदेशक जावेद शमीम शामिल हैं।
समिति ने रविवार को कोलकाता के विभिन्न पूजा पंडालों का निरीक्षण किया।
इस दौरान प्रवेश और निकास मार्ग, भीड़ प्रबंधन तथा अग्नि सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
सरकार का उद्देश्य अन्य पूजा पंडालों में इस प्रकार की दुर्घटना की आशंका कम करना है।
तीन पूजा समितियों को सुरक्षा संबंधी नोटिस
चोरबागन हादसे के बाद अग्निशमन विभाग ने अन्य प्रमुख पूजा पंडालों में भी सुरक्षा व्यवस्था की जांच तेज कर दी है।
सोमवार को कोलकाता की तीन पूजा समितियों को सुरक्षा संबंधी कमियों को लेकर नोटिस जारी किए गए।
निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर कम रोशनी और प्रवेश-निकास मार्गों के आसपास बाधाओं को लेकर आपत्ति जताई गई।
आयोजकों को सुरक्षा व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुरस्कार चयन के मानकों पर उठी बहस
दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव है।
हर वर्ष कोलकाता में सैकड़ों पूजा समितियां आकर्षक थीम, कलात्मक पंडाल और विशेष प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।
बड़ी पूजा समितियों को विभिन्न सरकारी और निजी पुरस्कार भी दिए जाते हैं।
लेकिन चोरबागन की घटना के बाद सवाल उठ रहा है कि पुरस्कार चयन में सुरक्षा व्यवस्था को कितना महत्व दिया जाता है।
तृणमूल कांग्रेस ने इसी मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग
किसी बड़े धार्मिक आयोजन में आकर्षक सजावट के साथ पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होना भी आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पूजा पंडालों में प्रवेश और निकास के अलग रास्ते, प्रशिक्षित स्वयंसेवक, आपातकालीन चिकित्सा सहायता तथा प्रभावी भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए।
इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार पंडाल की क्षमता निर्धारित करना भी महत्वपूर्ण है।
कम रोशनी, संकरे रास्ते और अचानक भीड़ बढ़ने जैसी परिस्थितियां दुर्घटना का खतरा बढ़ा सकती हैं।
हादसे के बाद सरकार की जवाबदेही पर सवाल
तृणमूल कांग्रेस के ताजा बयान ने चोरबागन भगदड़ मामले को राजनीतिक बहस का भी विषय बना दिया है।
पार्टी ने सवाल किया है कि जब किसी पूजा पंडाल को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया जाता है, तो वहां सुरक्षा व्यवस्था विफल होने की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी।
दूसरी ओर राज्य सरकार ने जांच और सुरक्षा निरीक्षण के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई शुरू की है।
फिलहाल पुलिस जांच और प्रशासनिक समीक्षा जारी है।
19 लोगों की मौत के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि भविष्य में बड़े पूजा आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। चोरबागन की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि भव्य सजावट और पुरस्कारों के साथ भीड़ प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था होना भी जरूरी है।