टीएमसी नेता कुनाल घोष का आरोप: वोटर लिस्ट में बड़ी हेराफेरी

Update: 2025-10-30 15:29 GMT
Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता कुनाल घोष ने 2002 की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही मतदाता सूची में इस तरह की अनियमितता “एक संभावित घोटाले” की ओर इशारा करती है। घोष ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने अशोक नगर विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 159 में गंभीर विसंगति पाई है। उनके अनुसार, 2002 के मतदाता सूची के हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा, “हार्ड कॉपी में मतदाताओं का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, लेकिन सॉफ्ट कॉपी में वही डेटा गायब है। यह एक बड़ी साजिश लगती है। बूथ नंबर 159 में कम से कम 900 मतदाता दर्ज हैं, लेकिन सॉफ्ट कॉपी में इनका कोई नामो-निशान नहीं है।”
टीएमसी नेता ने इसे “चुनावी प्रक्रिया से पहले का घोटाला” बताते हुए कहा कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ कर “लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर” करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, तब तक मतदाता सूची में बदलाव किसके आदेश पर किया गया? कुनाल घोष ने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत दर्ज करेगी और मांगेगी कि मतदाता सूची की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। उन्होंने कहा, “हम इस मामले को यहीं नहीं छोड़ेंगे। चुनाव आयोग को इस हेराफेरी की पूरी जांच करनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
टीएमसी के अनुसार, यह घटना न केवल चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने का प्रयास भी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मतदाता सूची में ही गड़बड़ी की जाएगी, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है। हालांकि, राज्य चुनाव आयोग की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आयोग के सूत्रों ने संकेत दिया है कि शिकायत मिलने के बाद तकनीकी टीम द्वारा डेटा की जांच कराई जा सकती है।
राजनीतिक हलकों में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि टीएमसी पहले से ही आगामी चुनावों को लेकर “राजनीतिक माहौल तैयार” करने की कोशिश कर रही है। वहीं टीएमसी इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बता रही है। कुनाल घोष ने कहा, “यह सिर्फ एक बूथ का मामला नहीं है। अगर एक जगह ऐसा हो सकता है, तो बाकी जिलों में भी जांच जरूरी है। यह मतदाता सूची नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता का सवाल है।”
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