Court के फैसले से तेज हुई राजनीतिक हलचल

Update: 2026-07-03 13:42 GMT
Kolkata कोलकाता :  कोलकाता, पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को वॉयस सैंपल देने से छूट की मांग मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनकी याचिका पर फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया। इसके साथ ही यह कानूनी मामला और आगे खिंचता नजर आ रहा है।
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी जांच से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान
अभिषेक बनर्जी
ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ और धमकी भरे बयान दिए थे। इसी जांच के तहत सीआईडी उनका वॉयस सैंपल लेना चाहती है।
इससे पहले 30 जून को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि यह तय करना न्यायालय का काम नहीं है कि जांच एजेंसी किस तरह जांच करे। बाद में न्यायमूर्ति घोष ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया।
इसके बाद शुक्रवार को अभिषेक बनर्जी की ओर से न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष जल्द सुनवाई की मांग की गई, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई 7 जुलाई से पहले संभव नहीं है।
इसी बीच, न्यायमूर्ति घोष के आदेश के बाद उत्तर 24 परगना की जिला अदालत ने 1 जुलाई को अभिषेक बनर्जी को दूसरा नोटिस जारी किया है। अदालत ने उन्हें 8 जुलाई सुबह 10 बजे न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में सीआईडी के समक्ष वॉयस सैंपल देने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें 7 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद ही तय होगा कि अभिषेक बनर्जी को वॉयस सैंपल देने से छूट मिलेगी या नहीं। वहीं यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह सुनवाई उनकी जिला अदालत में निर्धारित पेशी से ठीक एक दिन पहले होगी।
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