कोलकाता: पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। वाम मोर्चे की सहयोगी रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने चुनाव से पीछे हटने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग ने उसके उम्मीदवार को पार्टी का पारंपरिक चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किया और इसके स्थान पर 'बाल्टी' चुनाव चिह्न दिया गया।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू भी है। रिपोर्ट के मुताबिक नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 19 सितंबर को ही समाप्त हो चुकी थी। इसलिए RSP की घोषणा के बावजूद उसके उम्मीदवार बिकाश चंद्र मिश्रा का नाम मतपत्र पर बने रहने की बात सामने आई है। ऐसे में पार्टी का चुनाव से हटने का ऐलान व्यावहारिक रूप से विरोध दर्ज कराने वाला राजनीतिक फैसला माना जा रहा है।

पारंपरिक चुनाव चिह्न नहीं मिलने पर विवाद

RSP लंबे समय से अपने पारंपरिक 'फावड़ा और बेलचा' चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ती रही है। रेजीनगर उपचुनाव में भी पार्टी इसी चिह्न के साथ मैदान में उतरना चाहती थी।

पार्टी नेतृत्व के अनुसार शनिवार को नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद उसे बताया गया कि इस उपचुनाव में उसका पारंपरिक चुनाव चिह्न नहीं दिया जा सकता। इसके बजाय उम्मीदवार को 'बाल्टी' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना होगा।

RSP ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और कहा कि लंबे समय से जिस चुनाव चिह्न के साथ पार्टी की पहचान बनी हुई है, उससे अलग प्रतीक पर चुनाव लड़ना उसके लिए स्वीकार्य नहीं है।

पार्टी ने किया चुनाव से पीछे हटने का ऐलान

चुनाव चिह्न विवाद के बाद RSP ने सोमवार को रेजीनगर उपचुनाव से पीछे हटने की घोषणा कर दी। पार्टी नेतृत्व ने इसे चुनाव आयोग के फैसले के विरोध में उठाया गया कदम बताया है।

रिपोर्टों के मुताबिक RSP ने रेजीनगर से बिकाश चंद्र मिश्रा को मैदान में उतारा था। लेकिन चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की।

इस फैसले ने पहले से ही राजनीतिक रूप से चर्चा में चल रहे रेजीनगर उपचुनाव को नया मोड़ दे दिया है।

लेकिन बैलेट पर रह सकता है उम्मीदवार का नाम

RSP के चुनाव से पीछे हटने की घोषणा के बावजूद उम्मीदवार के आधिकारिक रूप से चुनाव मैदान से बाहर होने को लेकर अलग स्थिति है।

नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 19 सितंबर थी। पार्टी ने चुनाव से पीछे हटने की घोषणा इसके बाद की। रिपोर्ट के अनुसार इस कारण उम्मीदवार बिकाश चंद्र मिश्रा का नाम मतपत्र से हटना संभव नहीं होगा और वह तकनीकी रूप से चुनाव मैदान में बने रहेंगे।

इसका मतलब है कि मतदाताओं को मतदान के दिन उनका नाम और आवंटित चुनाव चिह्न दिखाई दे सकता है, भले ही पार्टी ने प्रचार या सक्रिय चुनावी भागीदारी से पीछे हटने की घोषणा की हो।

लेफ्ट फ्रंट के भीतर पहले से था मतभेद

रेजीनगर सीट पर उम्मीदवार उतारने को लेकर वाम मोर्चे के भीतर पहले से मतभेद सामने आए थे। रिपोर्ट के अनुसार लेफ्ट फ्रंट ने इस सीट से CPI(M) के सईद असद अली को समर्थन दिया था, लेकिन RSP इससे सहमत नहीं थी।

इसके बाद RSP ने बिकाश चंद्र मिश्रा को अपना उम्मीदवार बनाकर चुनाव मैदान में उतारा। इस तरह सहयोगी दलों के बीच उम्मीदवार चयन को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गया था।

अब चुनाव चिह्न का विवाद सामने आने के बाद RSP ने चुनाव से पीछे हटने की घोषणा कर दी है। इससे रेजीनगर में वाम दलों की चुनावी रणनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

6 अक्टूबर को होगा मतदान

रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होना है। इसी दिन नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। दोनों सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाने हैं।

उपचुनाव की प्रक्रिया के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव चिह्न को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। रेजीनगर में RSP का मामला भी इसी क्रम में चर्चा में आया है।

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम और आरक्षित 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न पर दावे के चलते चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए दोनों को मूल नाम और चिह्न इस्तेमाल करने से अंतरिम रूप से रोक दिया था।

नए चुनाव चिह्न से मतदाताओं तक पहुंचने की चुनौती

किसी राजनीतिक दल के लिए चुनाव चिह्न केवल बैलेट या ईवीएम पर बनी तस्वीर नहीं होता, बल्कि मतदाताओं के बीच उसकी पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम भी होता है।

पारंपरिक चिह्न बदलने पर उम्मीदवार को कम समय में नए चुनाव चिह्न को मतदाताओं तक पहुंचाना पड़ता है। खास तौर पर उपचुनाव में प्रचार की अवधि सीमित होने के कारण यह चुनौती और बढ़ सकती है।

RSP का तर्क भी अपने पारंपरिक चुनाव चिह्न से जुड़ी इसी पहचान पर केंद्रित है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से RSP को उसका पारंपरिक चिह्न क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया, इस पर उपलब्ध रिपोर्टों में विस्तृत आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस पहलू पर अंतिम निष्कर्ष आयोग के आदेश या विस्तृत स्पष्टीकरण के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

रेजीनगर में लगातार बदल रहा चुनावी घटनाक्रम

रेजीनगर उपचुनाव में पिछले कुछ दिनों के दौरान कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी पहले चुनाव से हटने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला बदलते हुए चुनाव लड़ने की बात कही।

अब RSP के चुनाव चिह्न विवाद ने इस सीट पर नया राजनीतिक घटनाक्रम पैदा कर दिया है।

फिलहाल RSP ने पारंपरिक चुनाव चिह्न नहीं मिलने के विरोध में चुनाव से पीछे हटने की घोषणा की है, लेकिन नामांकन वापसी की समयसीमा खत्म हो जाने के कारण उसके उम्मीदवार का नाम बैलेट पर बने रहने की बात सामने आई है। ऐसे में 6 अक्टूबर के मतदान से पहले पार्टी अपने उम्मीदवार को लेकर आगे क्या रुख अपनाती है, इस पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।

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