WESTBENGAL: कोलकाता के 1993 बउबाजार बम विस्फोट मामले में दोषी मोहम्मद राशिद खान की समय से पहले रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. अदालत ने उनकी रिहाई पर रोक लगाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह में जवाब मांगा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में राशिद खान को सजा पूरी होने से पहले रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे अब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की वेकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई की. पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि राज्य के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SRB) ने राशिद खान की रिहाई के खिलाफ सिफारिश दी थी, लेकिन इसके बावजूद हाईकोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया.
33 साल से जेल में बंद है राशिद खान
राशिद खान की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एमआर शमशाद ने दलील दी कि वह पिछले 33 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुका है. उन्होंने यह भी बताया कि सह-आरोपी पन्नालाल जायसवाल को 2014 में सजा में छूट मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर राहत मिलनी चाहिए.
हाईकोर्ट का आदेश और राज्य सरकार की आपत्ति
दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 जून को राशिद खान की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें रिहाई का निर्देश दिया था. कोर्ट ने उनकी लंबी कैद, उम्र (77 वर्ष) और स्वास्थ्य को आधार माना था. हालांकि राज्य सरकार ने इस आदेश को गलत बताते हुए कहा कि यह सुधारवादी सिद्धांत की गलत व्याख्या है.
1993 बम धमाका: बड़ा आतंकी हमला
16 मार्च 1993 को कोलकाता के बउबाजार इलाके में हुए बम धमाकों में करीब 69 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. इस मामले में राशिद खान को टीएडीए के तहत 2001 में दोषी ठहराया गया था. अदालत का मानना है कि वह इस हमले का मास्टरमाइंड था.
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी. फिलहाल राशिद खान की रिहाई पर रोक जारी रहेगी.