वोटर लिस्ट अपीलों का पहाड़ बंगाल में 37 लाख मामलों से बढ़ा संकट
37 लाख वोटर अपील
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों के निपटारे की रफ्तार को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद दाखिल हुई लाखों अपीलों का निपटारा मौजूदा गति से किया गया तो सभी मामलों को पूरा करने में करीब 12 साल तक का समय लग सकता है। चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दी गई मतदाता सूची से जुड़े करीब 37 लाख से अधिक मामले अभी लंबित हैं।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नामों को लेकर आपत्तियां और दावे सामने आए। इसके बाद प्रभावित मतदाताओं ने अपील दायर की। चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि लाखों अपीलें अभी विचाराधीन हैं और इनका निपटारा करने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं।
धीमी रफ्तार बनी सबसे बड़ी चुनौती
जानकारी के मुताबिक, अपीलों के निपटारे की गति काफी धीमी रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग 38 लाख से अधिक अपीलों में से करीब 1 लाख मामलों का ही निपटारा हो पाया है, जबकि बड़ी संख्या में मामले अभी लंबित हैं। इस रफ्तार को देखते हुए पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लगने की आशंका जताई जा रही है। मतदाता सूची से नाम हटने या नाम जोड़ने से जुड़े मामलों में समय पर फैसला नहीं होने से प्रभावित लोगों के सामने दस्तावेज जमा करने, सुनवाई में शामिल होने और अपनी पात्रता साबित करने की चुनौती बनी हुई है।
37 लाख मामलों का दबाव
SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की गई थी। इसके बाद कई नामों को लेकर विवाद सामने आया और अपील प्रक्रिया शुरू हुई। आयोग ने अदालत को यह भी बताया कि अपीलीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर लंबित मामलों के निपटारे के लिए प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय और दिशा-निर्देश न्यायिक प्रक्रिया के तहत तय होंगे।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा मामला
वोटर लिस्ट संशोधन और लंबित अपीलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। अदालत ने प्रक्रिया में तेजी लाने और प्रभावित मतदाताओं की शिकायतों के निपटारे को लेकर सवाल उठाए हैं। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों के मतदाता अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले समय में अपीलों के निपटारे की गति और ट्रिब्यूनल की कार्यक्षमता पर सभी की नजर रहेगी।