कोलकाता। झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में करीब चार दशकों से माओवादी गतिविधियों से जुड़े भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज को कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से तलाश में रहे असीम मंडल पर राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, असीम मंडल की गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर इलाके से की गई। STF की इस कार्रवाई को माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

लंबे समय से सक्रिय था माओवादी संगठन में

जानकारी के मुताबिक, असीम मंडल भाकपा (माओवादी) संगठन का एक वरिष्ठ नेता बताया जाता है। वह झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय से संगठन की गतिविधियों को संचालित करने में सक्रिय था।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, असीम मंडल का नाम माओवादी संगठन के शीर्ष स्तर के नेताओं में शामिल रहा है। वह संगठन की रणनीति, प्रचार और अन्य गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

STF ने गुप्त सूचना के आधार पर की कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, STF को असीम मंडल की मौजूदगी के संबंध में जानकारी मिली थी। इसके बाद टीम ने योजना बनाकर पूर्व मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर इलाके में कार्रवाई की।

कार्रवाई के दौरान STF ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से दो बैग भी बरामद किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

बरामद सामान की जांच जारी

पुलिस के अनुसार, असीम मंडल के पास से मिले बैग में माओवादी साहित्य, प्रचार सामग्री और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं।

जांच एजेंसियां इन सामानों की जांच कर रही हैं ताकि संगठन से जुड़े अन्य सदस्यों, संपर्कों और गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी

असीम मंडल की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से माओवादी गतिविधियों से जुड़े नेताओं की तलाश में जुटी एजेंसियों के लिए यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान संगठन की गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़े कई अहम पहलुओं का खुलासा हो सकता है।

सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था नेटवर्क

झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र लंबे समय से माओवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील रहे हैं। इन इलाकों में माओवादी संगठन समय-समय पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं।

सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों की ओर से इन क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं। असीम मंडल की गिरफ्तारी इसी अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।

पुलिस पूछताछ में जुटी

गिरफ्तारी के बाद पुलिस असीम मंडल से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह किन लोगों के संपर्क में था और वर्तमान में संगठन की क्या गतिविधियां चल रही थीं।

इसके अलावा उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और उसकी भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।

माओवादी नेटवर्क पर असर की संभावना

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, शीर्ष स्तर के किसी नेता की गिरफ्तारी से संगठन की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, माओवादी संगठनों के नेटवर्क और उनकी गतिविधियों को देखते हुए आगे भी सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।

STF और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही हैं।

आगे की जांच जारी

फिलहाल असीम मंडल से पूछताछ और बरामद सामान की जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन के नेटवर्क और उसकी गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब उसके संपर्कों और संगठन के अन्य सदस्यों पर है।

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