ममता बनर्जी बोलीं– सबसे बड़ा धर्म मानवता

Update: 2025-10-29 14:27 GMT
Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को लोकतंत्र, न्यायपालिका और मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि समाज में फूट डालो और राज करो की राजनीति नहीं चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चे लोकतंत्र में हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा होना आवश्यक है और यह तभी संभव है जब न्यायपालिका और मीडिया जैसे संस्थान स्वतंत्र और मज़बूत बने रहें। ममता बनर्जी ने कहा, “हम किसी भी तरह की फूट डालो और राज करो की नीति नहीं चाहते। हमारा मकसद है कि हर व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा हो। हर सच्चे मतदाता की उचित सुरक्षा और सम्मान लोकतंत्र की पहचान है।” उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र की रीढ़ दो स्तंभ हैं — न्यायपालिका और मीडिया — जो देश की आत्मा को जीवित रखते हैं। “अगर ये दोनों मज़बूत रहेंगे, तो लोकतंत्र अडिग रहेगा,” उन्होंने जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज समाज में विभाजन की कोशिशें तेज़ हो रही हैं, लेकिन बंगाल हमेशा एकता, प्रेम और मानवता का प्रतीक रहा है। “मैं सभी से कहना चाहती हूँ कि सबसे बड़ा धर्म मानवता है। जब हम इंसानियत के रास्ते पर चलते हैं, तो समाज में नफरत की कोई जगह नहीं रहती,” ममता ने कहा। उन्होंने केंद्र सरकार पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहने वालों को संविधान की भावना का सम्मान करना चाहिए, न कि नागरिकों को बांटने की कोशिश करनी चाहिए। “लोकतंत्र का अर्थ है सभी की आवाज़ को सुनना, न कि चुप कराना,” उन्होंने कहा।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता हमेशा से धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर एकजुट रही है, और यही राज्य की असली पहचान है। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह निष्पक्षता और साहस के साथ सच सामने लाए, क्योंकि “मीडिया ही वह आईना है जो जनता को सच्चाई दिखाता है। मुख्यमंत्री के इस बयान को राजनीतिक हलकों में सांप्रदायिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों की अपील के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में राजनीतिक तनाव और सामाजिक ध्रुवीकरण की घटनाएँ बढ़ी हैं।
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