कोलकाता। देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। उन्होंने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि वह INDIA गठबंधन के नेताओं के आग्रह पर दिल्ली जाएंगी और चल रहे आंदोलन में शामिल होंगी। ममता बनर्जी ने बताया कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के लिए 8 या 9 अक्टूबर का समय मांगा है। इस प्रतिनिधिमंडल की सूची में उनका नाम भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह अपनी जगह तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी को दिल्ली भेजना चाहती थीं, लेकिन गठबंधन के नेताओं के अनुरोध के बाद उन्होंने खुद आंदोलन में भाग लेने का फैसला किया।
ममता बनर्जी ने अपनी दिल्ली यात्रा के संबंध में बातचीत करते हुए कहा कि INDIA गठबंधन के नेताओं ने उनसे व्यक्तिगत रूप से आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल में उनका नाम शामिल होने के कारण उन्होंने दिल्ली जाने का निर्णय लिया है।ममता बनर्जी ने कहा, "मुझसे जाने के लिए कहा गया, इसलिए मैं जा रही हूं। INDIA गठबंधन के नेताओं की ओर से 8 या 9 तारीख को राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा गया है; उस लिस्ट में मेरा नाम भी शामिल है।"उन्होंने आगे कहा कि पहले उनका दिल्ली जाने का कोई निश्चित कार्यक्रम नहीं था। वह अभिषेक बनर्जी को भेजने पर विचार कर रही थीं, लेकिन गठबंधन के नेताओं ने उनसे स्वयं उपस्थित रहने का अनुरोध किया। इसके बाद उन्होंने अपनी योजना में बदलाव किया।तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने यह भी कहा कि जब विपक्षी दल एक साझा मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं, तब उससे अलग रहना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के लोग भी चाहते हैं कि वह दिल्ली जाकर इस आंदोलन में भाग लें। उनके अनुसार, विपक्षी गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों पर सभी सहयोगी दलों को एकजुट होकर अपनी बात रखनी चाहिए।
राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी में INDIA गठबंधन
विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के लिए समय मांगा है। प्रस्तावित बैठक का उद्देश्य निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से संबंधित चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखना है।जानकारी के अनुसार, INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए 7 से 9 अक्टूबर के बीच समय देने का अनुरोध किया था। विपक्षी दलों के बीच प्रतिनिधिमंडल को सीमित संख्या में रखने पर भी चर्चा हुई है। हालांकि, मुलाकात के लिए राष्ट्रपति सचिवालय से समय मिलने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।ममता बनर्जी ने अपने बयान में भी राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगे जाने की जानकारी दी है। उन्होंने मुलाकात निश्चित होने का दावा नहीं किया।
चुनाव आयोग के खिलाफ जारी है विपक्ष का आंदोलन
दरअसल, INDIA गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।हालांकि, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड को सही और अद्यतन रखना है।मंगलवार और बुधवार को दिल्ली में विपक्षी सांसदों और नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।पुलिस ने संबंधित इलाकों में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका था। विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया।गुरुवार को भी विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी रहा। राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और प्रदर्शन स्थलों के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
विपक्षी एकजुटता पर ममता बनर्जी का जोर
ममता बनर्जी पहले भी INDIA गठबंधन के संयुक्त आंदोलन का समर्थन कर चुकी हैं। उन्होंने 2 अक्टूबर को कहा था कि विपक्षी दलों का संघर्ष किसी एक पार्टी या नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा राजनीतिक मुद्दों से जुड़ा हुआ है।उस समय उन्होंने कहा था कि गठबंधन के सभी दलों को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया था कि चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दे पर वामपंथी दलों के नेताओं के साथ भी उनका संवाद हुआ है।ममता बनर्जी की दिल्ली यात्रा को इसी साझा राजनीतिक कार्यक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच विभिन्न मुद्दों पर मतभेद रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े विषय पर उन्होंने संयुक्त विरोध का समर्थन किया है।
अभिषेक बनर्जी को भेजने की थी शुरुआती योजना
अपनी यात्रा के संबंध में ममता बनर्जी ने विशेष रूप से बताया कि उन्होंने पहले दिल्ली में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अभिषेक बनर्जी को भेजने की योजना बनाई थी।इसके बाद INDIA गठबंधन के नेताओं की ओर से उनसे संपर्क किया गया। जब उन्हें बताया गया कि राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल में उनका नाम शामिल है, तो उन्होंने स्वयं दिल्ली जाने का निर्णय लिया।उनके इस बयान से स्पष्ट है कि राष्ट्रपति से मुलाकात का प्रस्ताव और विपक्षी नेताओं का आग्रह उनकी दिल्ली यात्रा के प्रमुख कारण हैं।
दिल्ली में विपक्ष के कार्यक्रम पर नजर
गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से INDIA गठबंधन के नेताओं के लिए दिल्ली के कनॉट प्लेस क्षेत्र में बैठक और दोपहर के भोजन का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की योजना की जानकारी सामने आई थी।विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं, राष्ट्रपति से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।फिलहाल ममता बनर्जी ने INDIA गठबंधन के नेताओं के आग्रह पर दिल्ली जाने और आंदोलन में शामिल होने की बात स्पष्ट कर दी है। हालांकि, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के लिए अंतिम समय निर्धारित होने और प्रतिनिधिमंडल की पूरी सूची को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।