कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई दर्दनाक भगदड़ के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सोमवार, 19 अक्टूबर को अग्निशमन विभाग ने दक्षिण कोलकाता के पांच प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों को विशेष निगरानी में रखने की जानकारी दी। विभाग ने पूजा समितियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रवेश और निकास मार्गों को व्यवस्थित रखने तथा अग्नि सुरक्षा संबंधी इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने वाले पंडालों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।चोरबागान में हुई भगदड़ के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने प्रमुख पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तेज कर दी है। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी तरह की अफरा-तफरी, आग लगने की घटना या भीड़ के दबाव से होने वाले हादसों को रोकना है।
पांच प्रमुख पूजा पंडालों पर विशेष नजर
अग्निशमन विभाग ने दक्षिण कोलकाता के चेतला, त्रिधारा, देशप्रिया पार्क और टॉलीगंज कल्चरल सहित प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाई है।इन पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रवेश और निकास मार्गों को सुचारु रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।अधिकारियों ने आयोजकों से कहा है कि पंडालों के आसपास अनावश्यक भीड़ जमा न होने दी जाए। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
तीन पूजा समितियों को अग्निशमन विभाग का नोटिस
अग्निशमन विभाग की उच्चस्तरीय टीम ने विभिन्न पूजा पंडालों का निरीक्षण करने के बाद तीन प्रमुख पूजा समितियों को सुरक्षा संबंधी कमियों पर नोटिस जारी किया।इनमें चेतला अग्रणी, बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन और त्रिधारा सम्मिलनी शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अग्नि सुरक्षा, रोशनी और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।विभाग ने पूजा समितियों को निर्देश दिया कि पंडालों के आसपास बनी अनधिकृत अस्थायी दुकानों और जोखिम पैदा करने वाले ढांचों को तत्काल हटाया जाए।
प्रवेश और निकास मार्गों को खुला रखने के निर्देश
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पूजा पंडालों में आने-जाने वाले रास्तों पर किसी भी तरह का अवरोध नहीं होना चाहिए।विशेष रूप से उन स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जहां संकरे रास्तों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुजरते हैं।बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन को पंडाल के भीतर पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करने और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण प्रवेश एवं निकास मार्ग बाधित नहीं होने देने के लिए कहा गया है।विभाग ने पंडालों के भीतर हवा के आवागमन की व्यवस्था बेहतर बनाने तथा पर्याप्त पंखे लगाने पर भी जोर दिया है।
एलपीजी सिलेंडर और ज्वलनशील सामग्री से खतरा
अग्निशमन विभाग ने पूजा पंडालों के आसपास एलपीजी सिलेंडरों और अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री की मौजूदगी पर चिंता जताई है।अधिकारियों के अनुसार, अस्थायी ढांचों के आसपास गैस सिलेंडर या आग पकड़ने वाली सामग्री होने से दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।इसी कारण पूजा आयोजकों को अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जोखिम वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
चोरबागान भगदड़ में 19 लोगों की मौत
उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, पंडाल में भारी भीड़, संकरे रास्तों और अफरा-तफरी के कारण स्थिति बिगड़ गई थी। पंडाल के गिरने की आशंका संबंधी एक घोषणा के बाद लोगों में दहशत फैलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, घटना के कारणों की जांच जारी है।
पूजा समितियों ने सुरक्षा इंतजामों का दिया भरोसा
त्रिधारा सम्मिलनी के वरिष्ठ पदाधिकारी देबाशीष कुमार ने बताया कि समिति ने उद्घाटन से पहले अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किया था।उन्होंने कहा कि पंडाल में आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और विभाग को अनुपालन रिपोर्ट भी सौंप दी गई है।वहीं बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी कहा कि श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए रोशनी और प्रवेश मार्गों की व्यवस्था बेहतर की गई है।
हादसों की पुनरावृत्ति रोकने पर प्रशासन का जोर
चोरबागान की घटना के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।अग्निशमन विभाग की निगरानी में प्रवेश और निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण से जुड़े उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।प्रशासन का प्रयास है कि दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से पंडालों में दर्शन कर सकें और चोरबागान जैसी दुखद घटना की पुनरावृत्ति न हो।
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