कोलकाता: दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम के दो तृणमूल नेताओं को पुलिस ने हत्या की कोशिश के एक मामले में गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से आग्नेयास्त्र भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि 2020 में डायमंड हार्बर जाते समय तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले में भी दोनों आरोपितों की संलिप्तता के प्रमाण मिले हैं।

हाल ही में दक्षिण 24 परगना के पद्मपुकुर इलाके के एक निवासी ने दोनों आरोपितों के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले उनकी हत्या का प्रयास किया गया था। इस मामले में पुलिस ने रिपन शेख और संजीव मंडल नामक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार दोनों के खिलाफ इलाके में बाइक सवारों के समूह के साथ दबदबा कायम करने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं।

गिरफ्तारी के संबंध में डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर बर्धन ने बताया कि घटना विधानसभा चुनाव से पहले हुई थी। हालांकि शिकायतकर्ता डर के कारण चुनाव से पहले शिकायत दर्ज कराने नहीं आ सके। चुनाव समाप्त होने के बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का दावा है कि अपने समर्थकों के साथ इलाके में ‘आतंक’ का माहौल पैदा करने के पीछे संजीव ही ‘मुख्य व्यक्ति’ है। संजीव स्थानीय पंचायत प्रधान का पति है।

डायमंड हार्बर के पुलिस अधीक्षक ने यह भी बताया कि नड्डा के काफिले पर हमले में भी गिरफ्तार आरोपितों की संलिप्तता रही है। उनके शब्दों में, ‘‘प्रारंभिक तौर पर हमें इस हमले की घटना में इन दोनों के संलिप्तता के प्रमाण मिले हैं। उस मामले की जांच बंद हो गई थी। हमने उस मामले को फिर से खोला है। उन्हें उस मामले की जांच के दायरे में लाया जाएगा। इसके अलावा इस घटना में और जो लोग शामिल हैं, उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा। किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।’’

उल्लेखनीय हैं कि दिसंबर 2020 में नड्डा डायमंड हार्बर में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने जाते समय नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। उस्ती थाना क्षेत्र के शिराकोल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 117 पर कई लोगों ने नड्डा और काफिले में शामिल अन्य वाहनों को निशाना बनाकर ईंट-पत्थर फेंके थे। नड्डा की गाड़ी को कोई विशेष नुकसान नहीं हुआ, हालांकि कई वाहनों के शीशे टूट गए थे।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने आरोप लगाया था कि तृणमूल की ओर से योजनाबद्ध तरीके से यह हमला किया गया था। हालांकि तत्कालीन सत्तारूढ़ दल तृणमूल ने सभी आरोपों से इनकार किया था।

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