Indian Railways: ट्रेन लेट हुई तो मिलेगा नाश्ता और खाना

Update: 2026-06-23 12:13 GMT

WESTBENGAL: भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए कई तरह की सेवाएं देता है, जिनके बारे में अधिकतर लोगों को पूरी जानकारी नहीं होती। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण सुविधा ट्रेन के लेट होने पर मिलने वाला मुफ्त भोजन भी है। देशभर में ट्रेनों के समय पर न चलने की समस्या आम है। कई बार ट्रेन कुछ मिनट लेट होती है, तो कभी घंटों तक यात्रियों को इंतजार करना पड़ता है। ऐसे हालात में रेलवे कुछ विशेष परिस्थितियों में यात्रियों को खाने-पीने की सुविधा देता है।

रेलवे के नियमों के अनुसार, खासकर राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और दुरंतो एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में देरी होने पर यात्रियों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह सुविधा ट्रेन की देरी के समय के आधार पर दी जाती है। अगर ट्रेन लगभग तीन घंटे या उससे अधिक देरी से चलती है, तो यात्रियों को हल्का नाश्ता या पेय पदार्थ दिए जा सकते हैं।

इस सुविधा के तहत यात्रियों को सुबह या शाम के समय चाय या कॉफी के साथ बिस्कुट दिए जा सकते हैं। कई मामलों में मक्खन लगा टोस्ट, फलों का रस और अन्य हल्का नाश्ता भी दिया जाता है। यदि देरी अधिक लंबी हो और भोजन का समय हो, तो यात्रियों को दोपहर या रात के खाने में चावल, दाल, राजमा या छोले जैसे सामान्य भोजन परोसे जा सकते हैं। कभी-कभी पूरी-सब्जी और अचार भी उपलब्ध कराया जाता है।

रेलवे का यह भी नियम है कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए साफ-सुथरा और साधारण भोजन उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें लंबे इंतजार के दौरान परेशानी न हो। हालांकि, कई यात्रियों को इस सुविधा की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे इसका लाभ नहीं ले पाते।

इसके अलावा, कुछ विशेष परिस्थितियों में यात्रियों को टिकट रिफंड की सुविधा भी मिल सकती है। यदि ट्रेन काफी देर से चल रही हो या उसके मार्ग में बड़ा बदलाव किया गया हो, तो यात्री टिकट कैंसिल कर रिफंड के लिए आवेदन कर सकते हैं। रेलवे स्टेशन के वेटिंग हॉल का उपयोग भी यात्रियों के लिए मुफ्त होता है, जिससे वे इंतजार के दौरान आराम कर सकें।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की तैनाती भी की जाती है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सहायता मिल सके और व्यवस्था बनी रहे।

रेलवे की ये सुविधाएं यात्रियों के सफर को कुछ हद तक आरामदायक बनाने के लिए शुरू की गई हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते।

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