खाली खजाने और कर्ज पर सरकार का बयान

Update: 2026-06-22 09:56 GMT

पश्चिम बंगाल: कोलकाता में पश्चिम बंगाल सरकार का पहला बजट पेश किया गया, जिसे वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में प्रस्तुत किया। बजट भाषण के दौरान उन्होंने राज्य की आर्थिक ति को लेकर गंभीर चिंता जताई और कहा कि नई सरकार को पिछली सरकार से भारी कर्ज और खाली खजाना विरासत में मिला है।

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बताया कि राज्य पर कुल 8,15,691 करोड़ रुपये का कर्ज है, जो अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि यह कर्ज राज्य की वित्तीय स्थिति को लगभग प्रभावित कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद नई सरकार इस आर्थिक संकट से उबरने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया गया है और बंगाल को वित्तीय संकट के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया गया है। हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार की सहायता और वित्तीय सुधारों के माध्यम से राज्य को विकास की राह पर वापस लाया जाएगा।

बजट में वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना भी प्रस्तुत की। आंकड़ों के अनुसार, राज्य के राजस्व घाटे को जीएसडीपी के 1.5 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं राजकोषीय घाटे को मौजूदा 2.91 प्रतिशत से घटाकर 2.07 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा कुल ऋण अनुपात को भी 38.29 प्रतिशत से घटाकर 37.98 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से राज्य की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी।

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि नई सरकार का मुख्य फोकस आर्थिक सुधार, पारदर्शिता और विकास की गति को बढ़ाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सही नीतियों और सख्त वित्तीय प्रबंधन के जरिए राज्य को फिर से मजबूत आर्थिक स्थिति में लाया जा सकता है।

बजट में कर्मचारियों और विभिन्न वर्गों के लिए कुछ राहतों का भी संकेत दिया गया है, जिससे लोगों में उम्मीद की किरण दिखाई दी है। हालांकि, सबसे बड़ा मुद्दा राज्य पर भारी कर्ज और उसे कम करने की चुनौती ही बना हुआ है।

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