हल्दिया/दीघा, पश्चिम बंगाल। दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष होने वाली रथयात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहली बड़ी रथयात्रा है, जिसे लेकर प्रशासन ने इसे पूरी तरह जनकेंद्रित और पारदर्शी आयोजन बनाने का निर्णय लिया है। इस बार रथयात्रा में वीआईपी संस्कृति को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
प्रशासन के अनुसार अब रथ खींचने की प्राथमिकता किसी मंत्री, नेता या सेलिब्रिटी को नहीं दी जाएगी, बल्कि आम श्रद्धालु ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ की डोर खींचेंगे। प्रशासन ने इसे “जनताई जनार्दन” की भावना से जोड़ते हुए आम लोगों की भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया है।
इस आयोजन से पहले गुरुवार को रथ की मरम्मत और ट्रायल रन भी किया गया, ताकि उसकी मजबूती, संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जा सके। मंदिर परिसर में इस बार एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां प्रशासन ने ‘धाम’ शब्द का उपयोग भी हटा दिया है। जानकारी के अनुसार पिछली सरकार के समय मंदिर को लेकर कई विवाद सामने आए थे, जिसके चलते इस बार का आयोजन प्रशासन के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है। रथयात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए कई स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सुरक्षा, ट्रैफिक, भीड़ नियंत्रण और मेडिकल सुविधा को लेकर विशेष योजना बनाई गई है।
जिला प्रशासन ने बताया कि इस बार रथयात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रशासन का कहना है कि हर श्रद्धालु को समान अवसर देना इस आयोजन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। रामनगर के विधायक चंद्रशेखर मंडल ने कहा कि पहले आयोजन में वीआईपी लोगों को अधिक प्राथमिकता दी जाती थी, जबकि आम भक्तों को रथ के पास जाने से रोका जाता था। लेकिन अब इस व्यवस्था को बदला जा रहा है ताकि हर व्यक्ति इस धार्मिक उत्सव का हिस्सा बन सके।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी इस बदलाव को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा तभी पूर्ण मानी जाती है जब हर वर्ग का व्यक्ति इसमें शामिल हो सके। वीआईपी और आम जनता के बीच दूरी इस पर्व की भावना के विपरीत थी, जिसे अब समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि यह रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक समानता और जनभागीदारी का भी प्रतीक बनेगी। सुरक्षा और व्यवस्था के बीच यह आयोजन प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है, जिसे शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।