मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बाढ़ और भूस्खलन में बचाए गए हाथी के बछड़े का नाम रखा ‘लकी’

Update: 2025-10-15 18:58 GMT
West Bengal पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में कर्सियोंग क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन के दौरान बचाए गए हाथी के बछड़े का नाम ‘लकी’ रखा। यह हाथी का बच्चा 5 अक्टूबर को कर्सियोंग वन विभाग के अधिकारियों द्वारा भारी बारिश और तबाही के बीच सुरक्षित निकाला गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अवसर पर कहा कि यह बछड़ा एक विशेष प्रतीक है, जो प्राकृतिक आपदाओं में वन्यजीवों और मानव समुदायों के बीच जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने अधिकारियों और वन कर्मियों की तारीफ की, जिन्होंने खतरे की परवाह किए बिना बछड़े को सुरक्षित बचाया।
कर्सियोंग क्षेत्र में अक्टूबर की शुरुआत में तेज बारिश के कारण बड़े पैमाने पर बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इस दौरान कई वन्यजीव प्रभावित हुए, जिनमें हाथी के झुंड भी शामिल थे। वन विभाग के अधिकारियों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और जोखिम में पड़े हाथी के बछड़े को सुरक्षित स्थान पर ले गए। ‘लकी’ नामकरण समारोह में वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाथी के बचाव और उसके भविष्य के लिए विशेष देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। बछड़े को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने तुरंत स्वास्थ्य जांच और भोजन व्यवस्था की।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बचाव प्रयास वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। हाथी के बछड़े का नामकरण न केवल राहत कार्य की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह लोगों में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता भी बढ़ाता है। वन विभाग ने बताया कि बछड़ा अब सुरक्षित है और उसे विशेष देखभाल और निगरानी के तहत रखा गया है। वन्यजीव अधिकारी नियमित रूप से उसकी सेहत और आहार की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा, स्थानीय समुदायों को भी बछड़े के साथ सुरक्षित रहने और प्राकृतिक आपदा के दौरान सहयोग करने के लिए शिक्षित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित वन्यजीवों और उनके आवास की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेगी। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण में मदद करें। कर्सियोंग में ‘लकी’ नामक बछड़े के बचाव और नामकरण की खबर ने पूरे राज्य में खुशी और उत्साह फैलाया है। स्थानीय मीडिया और सामाजिक संगठन भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस कदम को वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने यह संदेश दिया है कि प्राकृतिक आपदा के समय मानव और वन्यजीवों के बीच सहयोग और संवेदनशीलता बहुत महत्वपूर्ण है। ‘लकी’ का नाम न केवल बचाव के प्रयास को यादगार बनाता है, बल्कि लोगों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी जागृत करता है।
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