कोलकाता। देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एक ओर दिल्ली में विपक्षी 'INDIA' गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया घटनाक्रम सामने आया है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने राज्य में एक बार फिर एसआईआर कराने की मांग उठाई है। उन्होंने दावा किया कि पिछली प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं हुई थीं, इसलिए मतदाता सूची की दोबारा गहन जांच आवश्यक है। भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें हटाने के बजाय निष्पक्ष चुनाव कराने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए।
बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने फिर उठाई SIR की मांग
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपनी पार्टी का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से एसआईआर कराने की आवश्यकता है।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पिछली एसआईआर प्रक्रिया के दौरान राज्य में हिंसा हुई थी। चुनाव संबंधी दस्तावेज जलाने और निर्वाचन कर्मचारियों के साथ मारपीट करने जैसी घटनाएं भी सामने आई थीं।
उनके अनुसार, तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
भाजपा नेता ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दोबारा गहन जांच होनी चाहिए।
हालांकि, पिछली प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं के उनके दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का किया समर्थन
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का खुलकर समर्थन किया है।
भट्टाचार्य ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताएं दूर करने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए।
उन्होंने विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर भी सवाल उठाए।
भाजपा नेता का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार करने के प्रयासों का विरोध करने के बजाय राजनीतिक दलों को निर्वाचन आयोग के साथ सहयोग करना चाहिए।
दूसरी ओर विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ा है।
CJP के आंदोलन पर भाजपा ने उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन पर भी सामिक भट्टाचार्य ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति और संगठन को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें जनसमर्थन की कमी के कारण आंदोलनों का इस्तेमाल अव्यवस्था पैदा करने के लिए कर रही हैं।
भट्टाचार्य ने कहा कि प्रशासनिक संस्थाओं और न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देकर अशांति फैलाना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के फैसलों को चुनौती देने के लिए कानूनी और संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं।
भाजपा नेता के इन आरोपों पर संबंधित आंदोलनकारियों की प्रतिक्रिया अलग से सामने आ सकती है।
दिल्ली में CEC के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन
इधर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने की मांग को लेकर विपक्षी दलों तथा नागरिक संगठनों का विरोध जारी है।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनाव की घटनाएं भी सामने आई हैं।
13 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान अवरोधक पार करने की घटना के बाद सीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं को हिरासत में लिया था।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए।
वहीं निर्वाचन आयोग और भाजपा ने चुनावी हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
ममता बनर्जी भी कर चुकी हैं आंदोलन का समर्थन
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ चल रहे आंदोलन को अपना समर्थन दिया था।
दो अक्टूबर को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक में शामिल होने के बाद कोलकाता लौटने पर उन्होंने कहा था कि वह कॉकरोच जनता पार्टी और आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं तथा छात्रों के साथ हैं।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग का भी समर्थन किया था।
उनके इस रुख के विपरीत अब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल में दोबारा एसआईआर कराने की मांग उठाई है।
इससे राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद और स्पष्ट हो गए हैं।
मतदाता सूची से नाम हटने पर विपक्ष की चिंता
एसआईआर को लेकर देशभर में जारी विवाद का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया है।
विपक्षी दलों और आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटने के कारण उनके लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
आलोचकों ने विशेष रूप से गरीब, प्रवासी और दस्तावेज संबंधी कठिनाइयों का सामना करने वाले मतदाताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
दूसरी तरफ एसआईआर के समर्थकों का तर्क है कि मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों, दोहरे पंजीकरण और स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों को ठीक करना जरूरी है।
इसी मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
बंगाल का नाम बदलने के लिए विधेयक लाने की घोषणा
एसआईआर विवाद के अलावा सामिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलने के मुद्दे पर भी बयान दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जल्द ही विधानसभा में राज्य का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' करने के लिए विधेयक लाएगी।
इसके साथ ही उन्होंने हाल में कोलकाता में सीपीएम के पुस्तक स्टॉल पर हुए हमले से भाजपा का संबंध होने के आरोपों को खारिज किया।
भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पहचान सांस्कृतिक विविधता और बहुलतावाद से जुड़ी है तथा उनकी पार्टी हिंसा का समर्थन नहीं करती।
इन बयानों से मतदाता सूची विवाद के अतिरिक्त राज्य की राजनीति में अन्य मुद्दे भी चर्चा में आ गए हैं।
एसआईआर विवाद पर आगे क्या होगा?
फिलहाल पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर राजनीतिक दल अलग-अलग रुख अपना रहे हैं।
भाजपा ने नए सिरे से मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराने की मांग की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने वर्तमान प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग का समर्थन किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी दल और सीजेपी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
अब यह महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल में दोबारा एसआईआर कराने की भाजपा की मांग पर क्या रुख अपनाता है।
राज्य में नई एसआईआर प्रक्रिया कराने का कोई अंतिम निर्णय इस रिपोर्ट में पुष्टि के साथ सामने नहीं आया है।