Uttarakhand उत्तराखंड : इस बरसात के मौसम में जंगलों की सुरक्षा और निगरानी को हाई-टेक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। तराई पूर्वी वन प्रभाग ने जंगलों की रखवाली के लिए ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत जंगल में “ड्रोन सेना” तैनात की जाएगी, जो पूरे क्षेत्र पर नजर रखेगी और वन अपराधों पर रोक लगाने में मदद करेगी।
वन प्रभाग की सभी नौ रेंज में आधुनिक ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं। इन ड्रोन की मदद से जंगल के भीतर की गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी की जाएगी। साथ ही वनकर्मियों को जल्द ही इन ड्रोन के संचालन और निगरानी के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे तकनीक का प्रभावी उपयोग कर सकें।
वन विभाग के अनुसार, बरसात के मौसम में जंगलों के अंदर के रास्ते गश्त के लिए बेहद मुश्किल हो जाते हैं। भारी बारिश और जलभराव के कारण वनकर्मियों को पैदल या वाहनों से गश्त करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में निगरानी कार्य भी प्रभावित होता है।
इसी स्थिति का फायदा उठाकर कई बार लकड़ी तस्कर और वन माफिया सक्रिय हो जाते हैं और अवैध कटान या लकड़ी की तस्करी जैसी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। वन विभाग का मानना है कि ड्रोन निगरानी से ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
इसके अलावा, बरसात के दौरान नदियों और नालों में बहकर आने वाली लकड़ी की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती होती है। कई बार बहकर आई लकड़ी को अवैध रूप से उठा लिया जाता है, जिससे वन संपदा को नुकसान होता है। ड्रोन की मदद से इन क्षेत्रों की भी लगातार निगरानी की जाएगी।
वन विभाग का कहना है कि ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से न केवल निगरानी तेज और सटीक होगी, बल्कि दूर-दराज और दुर्गम इलाकों तक भी आसानी से नजर रखी जा सकेगी। इससे समय पर कार्रवाई करना भी संभव होगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम वन संरक्षण और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को और भी मजबूत किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ड्रोन भी शामिल किए जाएंगे।
कुल मिलाकर, तराई पूर्वी वन प्रभाग की यह पहल जंगलों की सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे बरसात के मौसम में वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।