देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही पार्टी इस बार दो प्रमुख मोर्चों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। पहला, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में गंवाई गई 23 सीटों पर जीत हासिल करना और दूसरा, पहली बार बड़ी संख्या में मतदान करने जा रहे युवाओं, विशेषकर जेनरेशन-ज़ेड (Gen Z) मतदाताओं तक प्रभावी पहुंच बनाना।
इसी रणनीति को लेकर नई दिल्ली में भाजपा की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठनात्मक मजबूती और चुनावी अभियान की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने की। बैठक में उत्तराखंड के वरिष्ठ नेताओं, संगठन के पदाधिकारियों और चुनावी रणनीति से जुड़े प्रमुख जिम्मेदार लोगों ने भाग लिया।
बैठक में स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि यदि पार्टी को उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनानी है तो पिछले चुनाव में हारी हुई 23 सीटों पर विशेष रणनीति के साथ काम करना होगा। इन सीटों पर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देने और जनसंपर्क अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन सीटों पर बेहतर समन्वय और प्रभावी चुनावी प्रबंधन के जरिए जीत की संभावनाओं को मजबूत किया जा सकता है।
इसके साथ ही भाजपा ने पहली बार मतदान करने वाले और सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से प्रभावित होने वाले Gen Z मतदाताओं पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। पार्टी का मानना है कि आने वाले चुनाव में युवाओं की भूमिका निर्णायक हो सकती है। इसलिए उनके बीच संवाद बढ़ाने, रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप, कौशल विकास और डिजिटल अवसरों जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई जा रही है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और अनुभवी कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ये नेता कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, युवा संगठनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं से संवाद स्थापित करेंगे। इसके अलावा युवा मतदाताओं की अपेक्षाओं और सुझावों को समझने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और संवाद अभियानों का आयोजन भी किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में पारंपरिक चुनावी अभियान के साथ-साथ डिजिटल और सोशल मीडिया आधारित प्रचार भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यही कारण है कि पार्टी सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी और प्रभाव को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। विशेष रूप से उन मुद्दों को सामने लाने की तैयारी है, जो युवाओं से सीधे जुड़े हैं।
दरअसल, हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर हुए छात्र आंदोलन ने भाजपा के लिए एक नया राजनीतिक संदेश दिया है। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। सोशल मीडिया के माध्यम से यह आंदोलन तेजी से देशभर में चर्चा का विषय बना और युवाओं की नाराजगी खुलकर सामने आई। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम ने भाजपा को यह एहसास कराया है कि युवा मतदाताओं की भावनाओं और अपेक्षाओं को नजरअंदाज करना आगामी चुनावों में नुकसानदेह साबित हो सकता है।
इसी वजह से पार्टी अब युवाओं से जुड़ी नीतियों, योजनाओं और उपलब्धियों को प्रभावी तरीके से उनके बीच पहुंचाने की तैयारी कर रही है। साथ ही संगठन स्तर पर भी ऐसे कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जा रही है, जिनसे युवा वर्ग की भागीदारी बढ़ सके और उन्हें पार्टी की विचारधारा एवं विकास कार्यों से जोड़ा जा सके।
बैठक में उत्तराखंड सरकार की उपलब्धियों को भी चुनावी अभियान का प्रमुख आधार बनाने पर सहमति बनी। राज्य में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, चारधाम परियोजना, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों को जनता तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की योजना बनाई गई है। पार्टी का मानना है कि विकास कार्यों और संगठन की मजबूती के बल पर वह तीसरी बार जनता का विश्वास हासिल कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में हर विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का इतिहास रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की चुनौती आसान नहीं होगी। हालांकि पार्टी इस बार चुनावी इतिहास बदलने के उद्देश्य से पहले से ही व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने, हारी हुई सीटों पर विशेष फोकस और युवाओं को केंद्र में रखकर चुनावी अभियान चलाने की योजना इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
आने वाले महीनों में भाजपा उत्तराखंड में कई बड़े संगठनात्मक कार्यक्रम, जनसभाएं और युवा संवाद अभियान आयोजित कर सकती है। इन अभियानों के माध्यम से पार्टी एक ओर अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास करेगी, वहीं दूसरी ओर नए और युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में आकर्षित करने की कोशिश करेगी।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की रणनीति में जहां पिछली बार हारी हुई 23 सीटों को दोबारा जीतने का लक्ष्य प्रमुख है, वहीं Gen Z मतदाताओं तक प्रभावी पहुंच बनाना भी चुनावी अभियान का अहम हिस्सा होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की यह नई रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव में कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है।