GIC बांगीधार में छात्रों के बाल काटने पर हंगामा

Update: 2026-07-24 04:28 GMT

बांगीधार : जीआईसी बांगीधार में अनुशासनहीनता के नाम पर छात्रों के साथ की गई कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को हंगामा खड़ा हो गया। आरोप है कि विद्यालय की भूगोल विषय की प्रवक्ता आरजू अफरोज अंसारी ने 12वीं कक्षा के पांच विद्यार्थियों के बाल कैंची से काट दिए। इतना ही नहीं, छात्रों की गणवेश पर ब्लेड चलाने और उनकी कापियों के पन्ने फाड़ने का भी आरोप लगाया गया है। घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी गई और मामले की शिकायत अधिकारियों तक पहुंचाई गई।

जानकारी के अनुसार, जीआईसी बांगीधार में कुछ छात्रों के बाल और वेशभूषा को लेकर अनुशासन का मामला सामने आया था। इसी दौरान प्रवक्ता ने छात्रों पर कार्रवाई करते हुए उनके बाल काट दिए। छात्रों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उन्हें अपमानित किया गया और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिससे वे मानसिक रूप से आहत हुए हैं।

बताया जा रहा है कि 12वीं कक्षा के पांच विद्यार्थियों के बाल काटे गए। छात्रों का कहना है कि विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन किसी भी छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाल काटने के साथ-साथ उनकी ड्रेस को भी नुकसान पहुंचाया गया और कापियों के पन्ने फाड़ दिए गए।

घटना की जानकारी मिलते ही विद्यालय परिसर में माहौल गर्म हो गया। छात्रों के बीच नाराजगी फैल गई और मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई। अभिभावकों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने भी आपत्ति जताई और विद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा। कई अभिभावकों ने कहा कि अनुशासन के नाम पर छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने घटना की जांच कराने की बात कही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि छात्रों के साथ किस परिस्थिति में और किस हद तक कार्रवाई की गई थी।

विद्यालय प्रबंधन की ओर से भी मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। स्कूल प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि घटना के समय क्या स्थिति थी और कार्रवाई करने का आधार क्या था। वहीं, संबंधित शिक्षिका से भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगे जाने की संभावना है।

छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालयों में अनुशासन जरूरी है, लेकिन विद्यार्थियों के सम्मान और अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षकों को छात्रों को समझाकर और नियमों के बारे में जागरूक कर अनुशासन कायम करना चाहिए, न कि ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए जिससे बच्चों को मानसिक परेशानी हो।

इस घटना ने विद्यालयों में अनुशासन बनाए रखने के तरीकों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र-छात्राओं के साथ व्यवहार करते समय शिक्षकों को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई में नियमों और बच्चों की गरिमा का ध्यान रखना आवश्यक है।

स्थानीय स्तर पर भी इस मामले की चर्चा हो रही है। लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि विद्यालय जैसी जगह पर छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि स्कूलों में ड्रेस कोड और अनुशासन के नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

फिलहाल मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है। अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका के खिलाफ विभागीय स्तर पर कदम उठाए जा सकते हैं।

घटना के बाद विद्यालय प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों को शांत करने का प्रयास किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

जीआईसी बांगीधार की यह घटना शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और छात्र अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को सामने लाती है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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