उत्तराखंड में पहाड़ों के बीच दौड़ेगी ट्रेन, 125 किमी रेल लाइन पर काम तेज
देहरादून। उत्तराखंड में रेल संपर्क को मजबूत बनाने की दिशा में निर्माणाधीन ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की जानकारी साझा करते हुए इसे हिमालय के बीच तैयार हो रहा 'इंजीनियरिंग चमत्कार' बताया। उन्होंने कहा कि 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन केवल एक रेलवे ट्रैक नहीं, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य की जीवनरेखा साबित होगी। परियोजना का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा, जो इसे देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजनाओं में शामिल करता है।
रेल मंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।उन्होंने लिखा, "हिमालय के बीच इंजीनियरिंग! 125 किमी, 12 स्टेशन, 83% सुरंगें। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन सिर्फ एक ट्रैक नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के भविष्य की जीवनरेखा है।"रेल मंत्री के अनुसार, यह परियोजना पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक रेलवे नेटवर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद रेलवे इंजीनियर और निर्माण एजेंसियां इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
16 मुख्य सुरंगों और 19 बड़े पुलों का निर्माण
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सुरंग आधारित निर्माण है।इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 104 किलोमीटर लंबी 16 मुख्य रेलवे सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त आपातकालीन निकासी और सुरक्षा के लिए लगभग 98 किलोमीटर लंबी 12 समानांतर निकासी सुरंगें बनाई जा रही हैंइस तरह परियोजना में कुल 28 मुख्य एवं निकासी सुरंगें शामिल हैं।इसके अलावा पहाड़ी नदियों और गहरी घाटियों को पार करने के लिए 19 प्रमुख रेलवे पुलों का निर्माण किया जा रहा है।रेलवे के अनुसार, निर्माण कार्य में अत्याधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा रहा है
सुरंग निर्माण में मिली बड़ी सफलता
रेल मंत्रालय की 29 जुलाई 2026 की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना की 104 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंगों में से लगभग 101 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका था।वहीं, लगभग 98 किलोमीटर लंबी निकासी सुरंगों में से 95 किलोमीटर से अधिक का काम पूरा हो गया था।इसके अतिरिक्त 19 प्रमुख पुलों में से 11 का निर्माण पूरा किया जा चुका था, जबकि शेष पुलों पर निर्माण जारी था।रेलवे ने निर्माण कार्य तेज करने के लिए आठ अतिरिक्त पहुंच सुरंगों का भी निर्माण किया है, जिनकी कुल लंबाई करीब पांच किलोमीटर है।
हिमालय की कठिन परिस्थितियों में चुनौतीपूर्ण निर्माण
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण हिमालय की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में किया जा रहा है।पहाड़ों की कठोर चट्टानों, कमजोर भूगर्भीय संरचनाओं और भूस्खलन की संभावनाओं के कारण सुरंग निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण है।रेलवे ने इस परियोजना में आधुनिक टनल बोरिंग मशीनों और अन्य उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया है।विशेष रूप से देवप्रयाग और जनासू के बीच लगभग 14.8 किलोमीटर लंबी टी-8 सुरंग का निर्माण महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल है।निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखने के लिए निरंतर निगरानी की व्यवस्था की गई है।
पांच जिलों को मिलेगा बेहतर रेल संपर्क
यह रेलवे लाइन उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरेगी।परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।रेल मार्ग से पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी और यात्रियों को सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।इससे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों को लाभ मिलने की संभावना है।
चारधाम यात्रा को मिलेगा बड़ा फायदा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा हैइस रेल लाइन के शुरू होने से बद्रीनाथ और केदारनाथ की ओर जाने वाले यात्रियों को पर्वतीय क्षेत्रों के नजदीक तक बेहतर रेल संपर्क मिल सकेगा।हालांकि, यह रेल लाइन सीधे चारों धामों तक नहीं जाएगी। चारधाम तक रेल संपर्क बढ़ाने के लिए अलग विस्तार योजनाओं का सर्वेक्षण किया गया है।रेलवे के अनुसार, इन विस्तार योजनाओं में हिमालय की भूकंपीय संवेदनशीलता बड़ी चुनौती है।
दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
रेल विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने सितंबर 2026 में बताया था कि परियोजना का लगभग 78 प्रतिशत समग्र कार्य पूरा हो चुका है।उन्होंने कहा था कि सुरंगों की खुदाई का करीब 97 प्रतिशत काम पूरा हो गया है और परियोजना को दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर यात्रा समय में कमी आने, पर्यटन को बढ़ावा मिलने और पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।