नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में सोमवार को उस समय दहशत फैल गई, जब एक बाघ इंसानी बस्ती के बेहद करीब पहुंच गया और दिनदहाड़े एक घोड़े का शिकार कर लिया। यह घटना गर्जिया इलाके में हुई, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक आते-जाते रहते हैं।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों में डर और चिंता बढ़ गई है। वीडियो में बाघ को घोड़े पर हमला करते और बाद में उसके शव को जंगल की ओर घसीटते हुए देखा जा सकता है। वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के लिए यह घटना इसलिए चिंता का विषय बनी है क्योंकि बाघ का मूवमेंट आबादी वाले क्षेत्र के बेहद करीब देखा गया।
नेशनल हाईवे के पास हुई घटना
जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार 17 अगस्त को दोपहर करीब 1:30 बजे हुई। बाघ ने नेशनल हाईवे-309 के पास झूला पुल चौराहे और पहले से विकसित गर्जिया टूरिज्म जोन के गेट के नजदीक घोड़े पर हमला किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाघ अचानक इलाके में पहुंचा और उसने घोड़े को अपना शिकार बना लिया। आसपास मौजूद लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो वहां अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर जाना शुरू कर दिया।
घटना के बाद इलाके में रहने वाले लोगों और पर्यटकों के बीच भय का माहौल बन गया। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर बाघ दिखाई दिया, वह पूरी तरह जंगल क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और यहां अक्सर पर्यटकों की आवाजाही रहती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में बाघ को घोड़े के पास देखा जा सकता है। इसके बाद वह घोड़े के शव को खींचकर जंगल की ओर ले जाता दिखाई देता है।
वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में किसी बड़ी घटना को रोका जा सके।
आबादी के करीब बाघ की मौजूदगी चिंता का विषय
रामनगर और आसपास का क्षेत्र वन्यजीवों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है। यहां कॉर्बेट नेशनल पार्क और आसपास के जंगल क्षेत्रों में बाघों की अच्छी संख्या पाई जाती है।
हालांकि, जब वन्यजीव अपने प्राकृतिक क्षेत्र से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंचते हैं तो मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है।
गर्जिया क्षेत्र में बड़ी संख्या में होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन गतिविधियां संचालित होती हैं। ऐसे में बाघ की मौजूदगी से स्थानीय व्यापारियों, पर्यटकों और ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
वन विभाग की निगरानी बढ़ने की उम्मीद
घटना के बाद वन विभाग की टीम क्षेत्र में निगरानी बढ़ा सकती है। आमतौर पर ऐसे मामलों में वन विभाग कैमरों के माध्यम से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखता है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ अक्सर भोजन की तलाश में जंगल से बाहर निकल आते हैं। यदि उन्हें आसानी से शिकार मिल जाता है तो वे दोबारा उसी क्षेत्र में आने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए ऐसे इलाकों में सतर्कता और निगरानी बेहद जरूरी होती है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील
वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। जंगल या वन क्षेत्र के आसपास अकेले जाने से बचना चाहिए और वन्यजीव दिखाई देने पर उनके करीब जाने या वीडियो बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए ताकि इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं को कम किया जा सके।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। जंगलों के आसपास बढ़ती आबादी, पर्यटन गतिविधियों का विस्तार और वन क्षेत्रों में बदलाव के कारण ऐसी घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है।
रामनगर की यह घटना एक बार फिर बताती है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी जरूरी है। प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल से ही ऐसी घटनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
फिलहाल गर्जिया इलाके में बाघ की मौजूदगी के बाद लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। वन विभाग की निगरानी और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।