देहरादून: उत्तराखंड में बारिश की गतिविधियां कम होते ही दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है। प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। वहीं कुछ इलाकों में रातें सामान्य से ठंडी बनी हुई हैं। इसके कारण दिन और रात के तापमान में करीब 11 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर देखने को मिल रहा है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच मौसम विभाग ने सात जिलों में बारिश की संभावना जताई है।
बारिश थमने के बाद आसमान साफ होने और तेज धूप निकलने से दिन के समय गर्मी का अहसास बढ़ गया है। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। कई स्थानों पर पारा सामान्य स्तर से तीन से चार डिग्री ऊपर पहुंच गया है। हालांकि सूर्यास्त के बाद तापमान में तेजी से गिरावट आने के कारण सुबह और रात के समय हल्की ठंडक महसूस हो रही है।
दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर लोगों के लिए परेशानी का कारण भी बन रहा है। दिन में गर्मी और रात में अपेक्षाकृत ठंडे मौसम के कारण शरीर को बदलते तापमान के अनुरूप ढलने में परेशानी हो सकती है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं रहने वाला है। सात जिलों में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। इनमें देहरादून, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग समेत अन्य पर्वतीय जिले शामिल हैं। कुछ स्थानों पर बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। इससे संबंधित क्षेत्रों में दिन के तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है।
पर्वतीय इलाकों में बारिश होने से सुबह और शाम की ठंडक और बढ़ सकती है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में धूप और नमी के कारण उमस महसूस होने की संभावना है। मौसम के बदलते मिजाज के कारण प्रदेश में तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां और कमजोर होने के साथ सुबह और रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट का सिलसिला भी शुरू हो सकता है।
इधर, मौसम में बदलाव के साथ उत्तराखंड में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। स्वाइन फ्लू, वायरल फीवर, चिकनगुनिया, डेंगू और टायफाइड जैसी बीमारियों से प्रभावित मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। मच्छर और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ने लगा है।
सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या में करीब 15 से 17 प्रतिशत तक इजाफा होने की बात सामने आई है। बुखार, शरीर में दर्द, सर्दी-जुकाम, खांसी, कमजोरी और पेट संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बारिश के बाद कई स्थानों पर पानी जमा रहने और वातावरण में नमी बने रहने से मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना महत्वपूर्ण है। कूलर, गमले, टायर, खुले बर्तन और पानी की टंकियों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रजनन बढ़ सकता है। इसी तरह जलजनित रोगों से बचने के लिए स्वच्छ पेयजल और खानपान की साफ-सफाई पर ध्यान देना जरूरी है।
वायरल फीवर के मरीजों में भी मौसमी बदलाव के दौरान वृद्धि देखी जाती है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण तापमान में होने वाला अचानक बदलाव स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। चिकित्सकीय सलाह के मुताबिक तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी अथवा अन्य गंभीर लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर है।
स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी और खांसी-जुकाम जैसे लक्षण होने पर स्वच्छता संबंधी उपायों का पालन उपयोगी हो सकता है। वहीं डेंगू की आशंका होने पर डॉक्टर की सलाह से जांच और उपचार कराया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी मौसमी बीमारियों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
सितंबर के आखिरी दिनों में उत्तराखंड के मौसम में दिन और रात के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। एक तरफ बारिश थमने के बाद दिन में पारा चढ़ रहा है तो दूसरी तरफ रातें ठंडी होने लगी हैं। सात जिलों में बारिश की संभावना के कारण मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। बदलते मौसम के साथ बढ़ रहे मौसमी, मच्छरजनित और जलजनित रोगों ने भी लोगों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में मौसम के साथ स्वास्थ्य को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी हो गया है।