बदरीनाथ धाम: दान और चढ़ावे की राशि में कथित हेराफेरी के मामले में जांच अब और तेज हो गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के तीन और कार्मिकों को पूछताछ के लिए चिन्हित किया है। एसआईटी जल्द ही इन कर्मचारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है।
मामले में पहले से जांच के दायरे में आए वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल के अलावा अब मंदिर समिति के अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांची जा रही है। वहीं, मंदिर समिति के खजांची संदेश मेहता को पहले ही पद से हटाकर नोटिस जारी किया जा चुका है। जांच एजेंसी का मानना है कि चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है।
एसआईटी की जांच का सबसे अहम पहलू बदरीनाथ धाम परिसर की गायब हुई सीसीटीवी फुटेज है। गुरुवार को भी जांच टीम 32 दिनों की गायब सीसीटीवी फुटेज को रिकवर करने के प्रयास में जुटी रही। इसके लिए एसआईटी ने सीसीटीवी कैमरों की डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) को अपने कब्जे में लिया हुआ है और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से फुटेज वापस हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
जांच में सामने आया है कि मंदिर समिति की ओर से एसआईटी को केवल 13 दिनों की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराई गई है, जबकि 32 दिनों की फुटेज गायब है। मंदिर समिति का कहना है कि तकनीकी कारणों के चलते यह रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं हो पाई। हालांकि, एसआईटी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए फुटेज रिकवरी में लगी हुई है। जांच अधिकारियों का मानना है कि अगर गायब फुटेज मिल जाती है तो चढ़ावा हेराफेरी मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि एसआईटी फिलहाल सीसीटीवी फुटेज के अध्ययन और तकनीकी जांच पर विशेष ध्यान दे रही है। फुटेज में जिन भी व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध नजर आएगी, उन्हें जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा और उनसे पूछताछ की जाएगी।
मंदिर समिति के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने भी स्पष्ट किया है कि एसआईटी जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, जिन तीन कर्मचारियों की भूमिका जांच में सामने आई है, उनमें से एक कर्मचारी मंदिर समिति से सेवानिवृत्त हो चुका है। बताया जा रहा है कि यह कर्मचारी पहले चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में शामिल रहा था। एसआईटी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावे की गणना और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी।
बदरीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में चढ़ावे की राशि में किसी भी प्रकार की अनियमितता का मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन और जांच एजेंसी दोनों ही इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
एसआईटी की जांच आगे बढ़ने के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल जांच टीम गायब सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। आने वाले समय में पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर मामले की तस्वीर और साफ होने की संभावना है।