पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों आदि कैलाश और ओम पर्वत की पवित्र यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है। यात्रा शुरू होते ही देशभर से आने वाले शिवभक्तों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है।
सीमांत नगर धारचूला में यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला तेज हो गया है। प्रशासन ने यात्रा के पहले दिन 481 यात्रियों को इनर लाइन परमिट जारी किए। परमिट मिलने के बाद श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारों के साथ अपने अगले पड़ाव गुंजी के लिए रवाना हो गए।
हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा धारचूला
आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। धारचूला पहुंचने के बाद यात्रियों ने प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कीं और परमिट प्राप्त किया।
परमिट जारी होने के बाद यात्रियों ने बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों के साथ यात्रा की शुरुआत की।
श्रद्धालुओं का पहला पड़ाव गुंजी रखा गया है। यहां पहुंचने के बाद यात्री आगे की धार्मिक यात्रा के लिए तैयार होंगे।
सोमवार को करेंगे आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, श्रद्धालु सोमवार को आदि कैलाश और ओम पर्वत के दिव्य दर्शन करेंगे।
आदि कैलाश को भगवान शिव का पवित्र धाम माना जाता है, वहीं ओम पर्वत अपनी प्राकृतिक संरचना के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है।
ओम पर्वत पर बर्फ से बनी प्राकृतिक आकृति ‘ॐ’ के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
प्रशासन ने किए सुरक्षा इंतजाम
यात्रा के सफल संचालन के लिए प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सीमांत क्षेत्र होने के कारण यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है।
इनर लाइन परमिट की प्रक्रिया के माध्यम से यात्रियों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, ताकि दुर्गम क्षेत्रों में यात्रा के दौरान बेहतर निगरानी और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
दुर्गम रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह
आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा आसान नहीं मानी जाती। ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों, कठिन रास्तों और बदलते मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं में भगवान शिव के दर्शन को लेकर उत्साह बना रहता है।
यात्री प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी वातावरण और धार्मिक आस्था के संगम का अनुभव करने के लिए इस यात्रा में शामिल होते हैं।
सीमांत क्षेत्र में बढ़ेगी धार्मिक पर्यटन गतिविधि
इस यात्रा के शुरू होने से पिथौरागढ़ जिले के सीमांत क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
स्थानीय लोगों को यात्रा के दौरान रोजगार के अवसर मिलते हैं और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
प्रशासन का प्रयास है कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए।
श्रद्धालुओं के लिए खास अनुभव
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का कहना है कि आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन उनके लिए आध्यात्मिक अनुभव है।
हिमालय की गोद में स्थित इन धार्मिक स्थलों तक पहुंचना उनके लिए जीवन के यादगार क्षणों में शामिल होता है।
यात्रा को लेकर प्रशासन सतर्क
दूसरे चरण की शुरुआत के साथ प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।
यात्रियों को मौसम और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है।
आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने के साथ ही सीमांत क्षेत्र एक बार फिर शिवभक्तों की आस्था और उत्साह से भर गया है।