स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, खुले दरवाजों और ओवरलोड बसों में हो रहा सफर

Update: 2026-07-24 05:26 GMT

Uttarakhand उत्तराखंड :  स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के दावों के बीच जमीनी हकीकत चिंताजनक नजर आई। गुरुवार दोपहर दैनिक जागरण की टीम ने शहर में चलने वाली स्कूल बसों और निजी वाहनों की पड़ताल की तो कई जगह सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आई। कई स्कूल बसें खुले दरवाजों के साथ सड़कों पर दौड़ती मिलीं, जबकि कुछ वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था।

बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने और वापस घर लाने के लिए स्कूल वाहनों में कई नियम तय किए गए हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान इन नियमों का पालन होता नजर नहीं आया। कई बसों में बच्चों की संख्या इतनी अधिक थी कि उन्हें बैठने में भी परेशानी हो रही थी। कुछ वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया गया था, जिससे किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी।

स्कूल बसों में सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियमों में से एक दरवाजों का सही तरीके से बंद होना है। इसके बावजूद कई बसें खुले दरवाजों के साथ चलती दिखाई दीं। चलते वाहन में दरवाजा खुला होना बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अचानक ब्रेक लगने या किसी अन्य स्थिति में बच्चे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ निजी वाहनों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। छोटे वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा था। कई जगह वाहन चालकों की ओर से यातायात नियमों की अनदेखी की गई।

अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित स्कूल भेजने के भरोसे वाहन चालकों और स्कूल प्रबंधन पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अगर स्कूल पहुंचने का रास्ता ही असुरक्षित हो तो बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल वाहनों की नियमित जांच होनी चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

स्कूल बसों के लिए परिवहन विभाग की ओर से कई सुरक्षा मानक निर्धारित किए गए हैं। इनमें बसों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, स्पीड गवर्नर, प्रशिक्षित चालक और सहायक कर्मचारी की मौजूदगी जैसे नियम शामिल हैं। इसके अलावा बसों में बच्चों की संख्या भी तय सीमा के अनुसार होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल वाहन चलाने वाले चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, क्योंकि उनके जिम्मे बच्चों की सुरक्षा होती है। वाहन चलाते समय सावधानी, गति नियंत्रण और यातायात नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

शहर में स्कूल खुलने और छुट्टी के समय बड़ी संख्या में बसें और निजी वाहन सड़कों पर निकलते हैं। ऐसे समय में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालकों और प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल वाहनों की औचक जांच की जाए। केवल अभियान चलाकर खानापूर्ति करने के बजाय नियमित निगरानी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

परिवहन विभाग और प्रशासन की ओर से समय-समय पर स्कूल वाहनों की जांच के अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन सामने आना चिंता का विषय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका पालन भी हो।

दैनिक जागरण टीम की पड़ताल में सामने आई तस्वीरें यह बताने के लिए काफी हैं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभी भी गंभीर सुधार की जरूरत है। स्कूल जाने वाले बच्चों का सफर सुरक्षित बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को जिम्मेदारी से काम करना होगा।

फिलहाल सवाल यह है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों का पालन कब तक सख्ती से कराया जाएगा। प्रशासन की सक्रियता और नियमित जांच से ही स्कूल वाहनों में हो रही लापरवाही पर रोक लगाई जा सकती है, ताकि बच्चों का हर सफर सुरक्षित हो सके।

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