हरिद्वार। उत्तराखंड में रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ गई है। नजीबाबाद मार्ग पर भागूवाला में नया टोल प्लाजा शुरू होने के बाद उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों का किराया बढ़ गया है। काशीपुर, रामनगर और हल्द्वानी समेत कई प्रमुख शहरों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को अब प्रति टिकट पांच रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। किराये में हुई इस बढ़ोतरी से नियमित यात्रियों में नाराजगी है। यात्रियों का कहना है कि पहले से ही महंगाई के कारण घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है और अब बस किराये में बढ़ोतरी ने उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ा दी है। खासकर प्रतिदिन बसों से सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और छोटे कारोबारियों पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।

भागूवाला टोल प्लाजा पर सितंबर 2026 में टोल वसूली शुरू की गई थी। इसके बाद नजीबाबाद-हरिद्वार मार्ग पर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी किराया बढ़ाया था। उस मार्ग पर किराया 98 रुपये से बढ़कर 106 रुपये होने की जानकारी सामने आई थी। अब उत्तराखंड रोडवेज की संबंधित सेवाओं में पांच रुपये अतिरिक्त किराया लिए जाने की बात सामने आई है।

नया टोल प्लाजा शुरू होते ही बढ़ा बस किराया

नजीबाबाद मार्ग पर भागूवाला में टोल प्लाजा शुरू होने के बाद सड़क से गुजरने वाले व्यावसायिक वाहनों पर टोल शुल्क लागू हो गया है। इसका असर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है।

टोल प्लाजा से गुजरने वाली बसों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। इससे परिवहन संचालन की लागत बढ़ती है। इसी अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए संबंधित मार्गों पर बस किराये में संशोधन किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड रोडवेज की काशीपुर, रामनगर और हल्द्वानी की ओर जाने वाली प्रभावित बस सेवाओं में प्रति यात्री पांच रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि, सभी मार्गों की संशोधित किराया सूची और बसों की श्रेणी के अनुसार अंतिम किराये की विस्तृत जानकारी परिवहन निगम से प्राप्त करना जरूरी है।

काशीपुर, रामनगर और हल्द्वानी जाने वालों पर असर

किराये में बढ़ोतरी का असर उन यात्रियों पर पड़ रहा है, जो हरिद्वार और नजीबाबाद मार्ग से कुमाऊं क्षेत्र के विभिन्न शहरों की यात्रा करते हैं।

काशीपुर, रामनगर और हल्द्वानी उत्तराखंड के प्रमुख शहरों में शामिल हैं। इन शहरों के बीच व्यापारिक, शैक्षणिक और रोजगार संबंधी गतिविधियों के कारण यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है।

रोडवेज बसें आम लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण साधन हैं। निजी टैक्सी और अन्य वाहनों की तुलना में रोडवेज बसों का किराया सामान्यतः किफायती होता है।

ऐसे में किराये में मामूली बढ़ोतरी भी नियमित यात्रियों के मासिक खर्च पर असर डाल सकती है। विशेष रूप से ऐसे यात्रियों को अधिक परेशानी हो सकती है, जिन्हें नौकरी या व्यवसाय के सिलसिले में बार-बार यात्रा करनी पड़ती है।

रोजाना सफर करने वालों की बढ़ेगी परेशानी

रोडवेज बस किराये में पांच रुपये की बढ़ोतरी देखने में छोटी लग सकती है, लेकिन नियमित यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती है।

यदि कोई यात्री प्रतिदिन आने और जाने के लिए बस का उपयोग करता है और दोनों दिशाओं में पांच-पांच रुपये अतिरिक्त किराया लगता है, तो उसे रोजाना दस रुपये अधिक खर्च करने होंगे।

इस हिसाब से महीने में 25 दिन यात्रा करने वाले व्यक्ति को लगभग 250 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।

वहीं, परिवार के कई सदस्य यदि नियमित रूप से बसों में सफर करते हैं, तो यह खर्च और बढ़ सकता है।

यात्रियों का कहना है कि परिवहन सेवाएं आम जनता की जरूरत हैं। इसलिए किराया बढ़ाते समय नियमित यात्रियों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अधूरे हाईवे पर टोल वसूली से उठे सवाल

भागूवाला टोल प्लाजा शुरू होने के बाद टोल वसूली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हरिद्वार-काशीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के बावजूद टोल वसूली शुरू होने पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी।

सितंबर में सामने आई जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश की ओर सड़क निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद भागूवाला में टोल वसूली शुरू कर दी गई थी। हालांकि, उत्तराखंड की ओर कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य जारी था।

टोल प्रबंधन ने बताया था कि फिलहाल संबंधित पूर्ण हिस्से के अनुसार ही शुल्क लिया जा रहा है। पूरी सड़क तैयार होने पर टोल दरों में बदलाव किया जा सकता है।

बसों से लिया जा रहा निर्धारित टोल शुल्क

भागूवाला टोल प्लाजा पर विभिन्न श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं।

उपलब्ध टोल दरों के अनुसार, बस और दो एक्सल तक के ट्रक के लिए एक तरफ की यात्रा का टोल शुल्क 310 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, उसी दिन वापसी यात्रा के लिए 465 रुपये शुल्क रखा गया है।

इसके अलावा व्यावसायिक वाहनों और अन्य श्रेणियों के लिए अलग दरें तय की गई हैं। स्थानीय वाहनों के लिए भी निर्धारित शर्तों के अनुसार रियायत की व्यवस्था है।

टोल शुल्क के कारण बस संचालन की लागत पर असर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि, अतिरिक्त लागत का कितना हिस्सा यात्रियों से वसूला जाए, यह संबंधित परिवहन निगम की किराया नीति और निर्धारित नियमों पर निर्भर करता है।

यात्रियों ने किराये में बढ़ोतरी पर जताई नाराजगी

किराये में बढ़ोतरी से यात्रियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। यात्रियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन का उद्देश्य आम लोगों को सस्ती और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है।

उनका मानना है कि टोल शुल्क लागू होने की स्थिति में सरकार और परिवहन निगम को ऐसे विकल्प तलाशने चाहिए, जिससे यात्रियों पर कम से कम आर्थिक बोझ पड़े।

विशेष रूप से विद्यार्थियों और कम आय वाले यात्रियों के लिए किराये में होने वाली लगातार बढ़ोतरी परेशानी का कारण बन सकती है।

यात्रियों की मांग है कि परिवहन निगम संशोधित किराया सूची स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करे, ताकि सफर शुरू करने से पहले लोगों को सही किराये की जानकारी मिल सके।

परिवहन सुविधाओं में सुधार की भी जरूरत

किराया बढ़ने के साथ यात्रियों की अपेक्षा है कि बस सेवाओं में सुविधाओं और समयबद्धता पर भी ध्यान दिया जाए।

कई यात्रियों के लिए रोडवेज बसें एकमात्र सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन विकल्प होती हैं। ऐसे में बसों का नियमित संचालन, साफ-सफाई, सुरक्षित यात्रा और निर्धारित समय पर सेवाएं उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।

यात्रियों का कहना है कि अतिरिक्त किराया लिए जाने की स्थिति में परिवहन व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखना भी जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन को अधिक उपयोगी बनाने के लिए संचालन लागत और यात्रियों की भुगतान क्षमता के बीच संतुलन आवश्यक है।

आने वाले दिनों में किराये पर बनी रहेगी नजर

भागूवाला टोल प्लाजा शुरू होने के बाद उत्तराखंड रोडवेज की प्रभावित बस सेवाओं में किराये की बढ़ोतरी ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है।

फिलहाल काशीपुर, रामनगर और हल्द्वानी समेत संबंधित मार्गों पर प्रति यात्री पांच रुपये अतिरिक्त किराया लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

यात्रियों को उम्मीद है कि परिवहन निगम उनकी परेशानियों को ध्यान में रखकर किराये और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर उचित कदम उठाएगा।

साथ ही भविष्य में टोल शुल्क में किसी बदलाव की स्थिति में बस किराये पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर भी यात्रियों की नजर रहेगी। फिलहाल नए टोल प्लाजा के कारण प्रभावित मार्गों पर रोडवेज बसों का सफर महंगा हो गया है।

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