परीक्षा से पहले लीक हुआ प्रश्नपत्र, आरोपी प्रोफेसर पर विश्वविद्यालय का शिकंजा
देहरादून : देशभर में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर जारी विवाद के बीच अब उत्तराखंड से भी परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। देहरादून स्थित वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) में बीटेक (BTech) के दो विषयों के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। वहीं, पुलिस ने इस मामले में आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, बीटेक की अंतिम परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक होने की शिकायत सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि शिवालिक कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता ने कथित रूप से परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल एक व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किए थे।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किए गए प्रश्न अंतिम परीक्षा पत्र में शामिल सवालों से करीब 90 से 95 प्रतिशत तक मेल खा रहे थे। इस जानकारी के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया।
आरोप है कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपने 22 पसंदीदा छात्रों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के सवाल लीक किए थे। हालांकि, इस मामले में पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं और इससे मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता है। इसलिए मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस ने आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि पेपर लीक की पूरी प्रक्रिया कैसे हुई और इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रश्नपत्र किन माध्यमों से और कितने लोगों तक पहुंचा।
पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में तकनीकी विश्वविद्यालय जैसी संस्था में इस तरह का मामला सामने आना परीक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि दोबारा परीक्षाएं निर्धारित नियमों के अनुसार कराई जाएंगी। रद्द की गई परीक्षाओं की नई तारीख जल्द जारी की जाएगी।
गौरतलब है कि देश में हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिसके बाद परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय का यह मामला भी इसी कड़ी में एक बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है। अब जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे प्रकरण में कितने लोग शामिल थे और पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था।