Uttarakhand उत्तराखंड : मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए जनपद में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय बनाए रखने और नयार नदी के पुनर्जीवन कार्यों को गति देने के उद्देश्य से सोमवार को जिला स्तर पर कई अहम कदम उठाए गए। जिला मुख्यालय पौड़ी के प्रभारी सचिव दिलीप जावलकर ने इस दौरान जिला आपदा परिचालन केंद्र का निरीक्षण किया और वहां चल रही राहत एवं बचाव तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी संसाधनों, व्यवस्थाओं और तैयारियों को बारीकी से देखा और संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठकों में भी उन्होंने विभागवार मानसून तैयारियों का विस्तृत आकलन किया। इस बैठक में विभिन्न विभागों की ओर से अब तक किए गए कार्यों, भविष्य की योजनाओं और संभावित जोखिमों से निपटने की तैयारियों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही विकास योजनाओं की प्रगति और नयार नदी पुनर्जीवन परियोजना की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और आगे की कार्ययोजना पर विचार साझा किए।
प्रभारी सचिव ने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को पूरी सतर्कता और आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई ही नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है, इसलिए सभी व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त रहनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान जिला आपदा परिचालन केंद्र की कार्यप्रणाली को भी परखा गया। यहां स्थापित कंट्रोल रूम की व्यवस्था, शिकायत निवारण कक्ष की कार्यप्रणाली और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। इसके साथ ही खोज एवं बचाव कार्यों में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों की उपलब्धता और उनकी स्थिति की भी जांच की गई। स्टोर में रखे आपदा राहत उपकरणों और सामग्री का भी निरीक्षण किया गया ताकि जरूरत के समय किसी प्रकार की देरी या कमी न हो।
ड्रोन व्यवस्था की भी समीक्षा इस दौरान की गई, जिससे आपदा प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी और स्थिति का आकलन तेजी से किया जा सके। प्रभारी सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हुए निगरानी और सूचना प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए। इससे आपदा के समय सही जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी और राहत कार्यों को तेजी से संचालित किया जा सकेगा।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध, नदी जलस्तर में वृद्धि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बनी रहती है। ऐसे में सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहना होगा और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी सुनिश्चित करनी होगी। विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाने और वहां आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
नयार नदी पुनर्जीवन परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। नदी के पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों को पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया। इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम किया जा रहा है।
बैठक में मौजूद अधिकारियों को यह भी कहा गया कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और सभी योजनाएं तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। इसके लिए नियमित निगरानी और फील्ड स्तर पर निरीक्षण को आवश्यक बताया गया। साथ ही विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया गया।
प्रभारी सचिव ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सभी विभागों का सामूहिक दायित्व है। इसलिए हर स्तर पर सहयोग और तत्परता जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाने चाहिए।
इस पूरे निरीक्षण और समीक्षा बैठक के बाद यह संकेत दिया गया कि आने वाले मानसून सीजन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय मोड में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।