घरेलू गैस के नए कनेक्शन पर रोक, कंपोजिट सिलेंडर का विकल्प उपलब्ध
देहरादून में नए घरेलू गैस कनेक्शन बंद
देहरादून: घरेलू रसोई गैस का नया कनेक्शन लेने की तैयारी कर रहे उपभोक्ताओं का इंतजार लंबा होता जा रहा है। देहरादून में तेल कंपनियों की ओर से नए घरेलू गैस कनेक्शन जारी करने पर रोक बनी हुई है। इससे पहली बार कनेक्शन लेने वाले परिवारों को परेशानी हो रही है। ताजा स्थानीय जानकारी के अनुसार, नए कनेक्शन के लिए आवेदनों की संख्या 1932 से अधिक पहुंच गई है। हालांकि, पहले से जारी कनेक्शन को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कराने की सुविधा चालू है।
नए कनेक्शन और पुराने कनेक्शन के ट्रांसफर की अलग स्थिति के कारण उपभोक्ताओं में असमंजस है। जिला आपूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल के मुताबिक, मौजूदा उपभोक्ता निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना कनेक्शन दूसरी एजेंसी में ट्रांसफर करा सकते हैं। इसके लिए संबंधित एजेंसी से आवश्यक दस्तावेज लेकर नई एजेंसी में प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उपलब्ध रिपोर्ट में जिले की 70 एजेंसियों पर ट्रांसफर सुविधा चालू होने की जानकारी दी गई है। नए कनेक्शन दोबारा शुरू होने की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
यह समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। छह सितंबर की रिपोर्ट में लगभग 1930 आवेदन लंबित होने और कई महीनों से नए कनेक्शन की प्रक्रिया प्रभावित होने का उल्लेख था। उस समय विभागीय सूत्रों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के नए कनेक्शन का पोर्टल 25 मार्च से बंद था। मौजूदा उपभोक्ताओं की आपूर्ति बनाए रखना इसकी वजह बताया गया था। हालांकि, आज की स्थिति में रोक हटाने की समयसीमा या कंपनियों का नया विस्तृत आदेश उपलब्ध नहीं है।
नया कनेक्शन नहीं मिलने का असर विशेष रूप से किराये पर रहने आए लोगों और अलग गृहस्थी शुरू करने वाले परिवारों पर पड़ रहा है। पहले की रिपोर्ट में ऐसे आवेदकों के गैस एजेंसियों तथा आपूर्ति कार्यालय पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। नए शहर में रहने की व्यवस्था करते समय खाना बनाने का नियमित साधन जरूरी होता है। कनेक्शन शुरू होने की तारीख स्पष्ट नहीं होने से परिवारों के लिए अपने खर्च और दैनिक जरूरतों की योजना बनाना कठिन हो सकता है। सात अक्टूबर की स्थानीय रिपोर्ट में दस किलोग्राम के कंपोजिट सिलेंडर को तत्काल जरूरत के विकल्प के रूप में उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इंडेन और भारत गैस की एजेंसियों पर यह सुविधा शुरू की गई थी। जिला आपूर्ति अधिकारी ने भी इन एजेंसियों पर कंपोजिट सिलेंडर उपलब्ध होने की बात कही थी। उस समय शुरुआती खर्च लगभग 4500 से 5000 रुपये बताया गया था, लेकिन वर्तमान कुल भुगतान की पुष्टि संबंधित एजेंसी से करनी होगी।
कंपोजिट सिलेंडर लेते समय उपभोक्ताओं को उसकी श्रेणी और रिफिल दर समझना जरूरी है। इंडियन ऑयल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उसका दस किलोग्राम वाला ‘एक्स्ट्रालाइट नाउ’ फ्री ट्रेड एलपीजी उत्पाद है। इसकी रिफिल स्थानीय वाणिज्यिक एलपीजी दर पर मिलती है। इसलिए केवल सिलेंडर का आकार देखकर उसे नियमित घरेलू कनेक्शन के समान दर वाला विकल्प नहीं मानना चाहिए। शुरुआती उपकरण लागत और बाद में गैस भरवाने के खर्च को अलग-अलग समझने से सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
कंपनी के अनुसार, यह उत्पाद उन ग्राहकों के लिए भी उपयोगी है जिन्हें स्थानीय पते का प्रमाण देने में कठिनाई होती है। इसे लेने की प्रक्रिया में पहचान प्रमाण और मोबाइल नंबर की आवश्यकता बताई गई है। भाग लेने वाले वितरकों तथा बिक्री केंद्रों से इसकी उपलब्धता की जानकारी ली जा सकती है। दूसरे शहर में रिफिल की सुविधा भी स्थानीय उपलब्धता और लागू प्रक्रियाओं पर निर्भर है। इन शर्तों को सभी कंपनियों के प्रत्येक कंपोजिट सिलेंडर पर समान रूप से लागू नहीं समझना चाहिए।
कंपोजिट सिलेंडर की बनावट पारंपरिक स्टील सिलेंडर से अलग होती है। इंडियन ऑयल के तकनीकी विवरण के अनुसार, इसमें अंदरूनी लाइनर, फाइबर आधारित कंपोजिट परत और बाहरी आवरण होता है। इसका वजन अपेक्षाकृत कम रहता है तथा पारदर्शी हिस्से से गैस का स्तर देखने में मदद मिलती है। हालांकि, वजन और डिजाइन की सुविधा से अलग, उपभोक्ता के लिए नियमित रिफिल की उपलब्धता तथा कुल खर्च भी महत्वपूर्ण हैं। खरीदने से पहले दोनों पहलुओं की जानकारी लेना उपयोगी होगा।
जिन लोगों के पास पहले से घरेलू कनेक्शन है, उन्हें नया आवेदन करने से पहले स्थानांतरण की प्रक्रिया पूछनी चाहिए। एजेंसी बदलने या शहर बदलने की स्थिति में दस्तावेज और उपकरण जमा करने की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए अपनी वर्तमान एजेंसी तथा जिस एजेंसी में जाना है, दोनों से प्रक्रिया स्पष्ट कर लेना बेहतर है। किसी मध्यस्थ को भुगतान करने के बजाय अधिकृत कार्यालय से शुल्क और दस्तावेजों का विवरण लेना चाहिए। फिलहाल देहरादून के नए आवेदकों के लिए मुख्य अनिश्चितता नियमित घरेलू कनेक्शन शुरू होने की तारीख है। ट्रांसफर सुविधा मौजूदा कनेक्शनधारकों को राहत दे सकती है, जबकि पहली बार कनेक्शन लेने वालों को उपलब्ध विकल्पों की शर्तें समझनी होंगी। लंबित आवेदनों की स्थिति और अगली प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट सूचना मिलने से बार-बार एजेंसी जाने की परेशानी कम हो सकती है। रोक हटने की आधिकारिक घोषणा तक किसी अनुमानित तारीख को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।