मेक इन इंडिया अभियान को धक्का, किराए पर आई चाइनीज ई-टिकटिंग मशीन

स्वदेशी अभियान को क्षति

Update: 2022-05-14 08:03 GMT

जनता से रिश्ता वेबडेस्क : उत्तराखंड परिवहन निगम ने 1300 ई-टिकटिंग मशीनें मंगाई हैं, जिन्हें अलग-अलग डिपो में बांटा जा रहा है।कुमाऊं मंडल के खाते में 655 मशीनें आई हैं। जबकि इससे पहले हैदराबाद में निर्मित मशीन का उपयोग किया जा रहा था।लंबे समय से सभी डिपो मशीनों की मांग कर रहे थे। लेकिन रोडवेज प्रबंधन ने जो ई-टिकट मशीन परिचालकों को थमाई है, वह मेड इन चाइना है। यह मशीन के बाहर ही साफ-साफ लिखा है। जबकि इससे पहले मेड इन इंडिया मशीनें ही परिचालकों को दी गई थीं।

स्वदेशी अभियान को क्षति

ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि स्वदेशी उत्पाद व तकनीक को बढ़ावा देने के दौर में परिवहन निगम ने मेड इन चाइना की मशीनें 450 रुपये रोजाना के हिसाब से किराए पर क्यों ली होंगी। दावा इन मशीनों के और ज्यादा अपडेट होनेे का है। लेकिन कई परिचालकों का कहना है कि इनकी बैट्री जल्द डिस्चार्ज हो रही है।परिवहन निगम में मैन्युअल हाथ से टिकट काटने का दौर करीब 10 साल पहले खत्म हो गया था। इसके बाद मशीन से टिकट काटा जाने लगा, मगर सालों पुरानी मशीनें होने के कारण अक्सर इनमें तकनीकी दिक्कत आ जाती थीं। जिसके बाद इन्हें मरम्मत के लिए देहरादून मुख्यालय भेजना पड़ता था।

दूसरी तरफ इमरजेंसी में मैन्युअल टिकट काटने पर संचालन प्रभावित हो जाता। इस वजह से डिपो अफसरों से लेकर कर्मचारी तक नई ई-टिकट मशीनें खरीदने की मांग कर रहे थे।निगम प्रबंधन ने नई मशीनें खरीदने के बजाय इन्हें किराये पर ले लिया, मगर यह सभी मेड इन चाइना माडल है। जबकि इससे पहले भारतीय मशीनें थी, जो हैदराबाद में निर्मित थीं। 

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