रुद्रप्रयाग : केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के जवान लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं। केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन की आशंका वाले चिरबासा स्लाइडिंग जोन में SDRF टीम ने बड़ा राहत और बचाव अभियान चलाते हुए करीब 9 हजार तीर्थयात्रियों को प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित पार कराया। दुर्गम पहाड़ी रास्ते और भूस्खलन के खतरे के बीच जवानों ने यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की।
सोनप्रयाग पोस्ट की SDRF टीम ने सब-इंस्पेक्टर आशीष डिमरी के नेतृत्व में चिरबासा क्षेत्र में मोर्चा संभाला। स्लाइडिंग जोन होने के कारण इस हिस्से से यात्रियों का गुजरना जोखिम भरा था। ऐसे में SDRF जवानों ने यात्रियों को नियंत्रित तरीके से एक-एक कर सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाने का काम किया।
जानकारी के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान करीब 9 हजार तीर्थयात्रियों को चिरबासा स्लाइडिंग जोन से सुरक्षित निकाला गया। यात्रियों की बड़ी संख्या को देखते हुए SDRF के जवानों को लगातार मौके पर तैनात रहकर व्यवस्था संभालनी पड़ी।
केदारनाथ का पैदल मार्ग पहाड़ी और दुर्गम इलाकों से होकर गुजरता है। कई स्थानों पर बारिश और पहाड़ से मलबा आने के कारण रास्ता संवेदनशील हो जाता है। चिरबासा भी ऐसे ही क्षेत्रों में शामिल है, जहां भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। इसी को देखते हुए यहां सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी रखी जा रही है।
SDRF टीम ने प्रभावित हिस्से में यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित किया। जवान रास्ते के दोनों ओर मौजूद रहकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से स्लाइडिंग जोन पार कराते रहे। बुजुर्गों, महिलाओं और ऐसे यात्रियों पर विशेष ध्यान दिया गया जिन्हें कठिन रास्ते पर चलने में परेशानी हो रही थी।
इस दौरान जवानों को दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा। पहाड़ी रास्ते पर एक ओर खड़ी चट्टानें और दूसरी ओर ढलान होने के कारण छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसके बावजूद SDRF टीम ने सतर्कता के साथ राहत अभियान जारी रखा।
चिरबासा स्लाइडिंग जोन में लगातार निगरानी रखी जा रही है। SDRF के जवान यात्रियों को खतरे वाले क्षेत्र में रुकने से बचने और तेजी के साथ सुरक्षित हिस्से की ओर बढ़ने में मदद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में यात्रियों के एक साथ पहुंचने की स्थिति में भीड़ नियंत्रित करना भी राहत टीम के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।
सब-इंस्पेक्टर आशीष डिमरी के नेतृत्व में टीम ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे अभियान का संचालन किया। जवानों ने पैदल मार्ग की स्थिति को देखते हुए यात्रियों को समूहों में प्रभावित क्षेत्र से आगे बढ़ाया, जिससे रास्ते पर अनावश्यक भीड़ जमा न हो।
केदारनाथ यात्रा में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। गौरीकुंड से केदारनाथ तक का पैदल मार्ग कई किलोमीटर लंबा है और यात्रियों को ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र से गुजरना पड़ता है। मौसम में अचानक बदलाव होने पर यहां यात्रा और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
बारिश के दौरान पहाड़ों से मिट्टी, पत्थर और मलबा गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए SDRF समेत विभिन्न राहत एजेंसियों की टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात रहती हैं।
चिरबासा क्षेत्र में भी जवानों की मौजूदगी के कारण बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही संभव हो सकी। प्रभावित हिस्से से गुजरने वाले यात्रियों को SDRF जवानों ने जरूरी दिशा-निर्देश दिए और सावधानी के साथ रास्ता पार कराया।
राहत अभियान के दौरान यात्रियों को जल्दबाजी नहीं करने और जवानों के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। पहाड़ी रास्ते पर संतुलन बनाए रखना और निर्धारित मार्ग से ही गुजरना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी होता है।
SDRF के जवान केवल यात्रियों को रास्ता पार कराने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी। रास्ते की स्थिति बिगड़ने की आशंका होने पर यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया, ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर बड़ी संख्या में बुजुर्ग और दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी यात्रा करते हैं। ऊंचाई, ठंड और कठिन चढ़ाई के कारण कई यात्रियों को अतिरिक्त मदद की जरूरत पड़ती है। ऐसे यात्रियों की सहायता में SDRF जवान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
करीब 9 हजार तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने का अभियान राहत टीमों के लिए बड़ी जिम्मेदारी वाला रहा। यात्रियों की संख्या अधिक होने के बावजूद जवानों ने चरणबद्ध तरीके से उन्हें सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाया।
चिरबासा स्लाइडिंग जोन में फिलहाल SDRF की निगरानी और राहत कार्य लगातार जारी हैं। जवानों का फोकस इस बात पर है कि केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को संवेदनशील हिस्से से सुरक्षित तरीके से निकाला जाए और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
कठिन मौसम और दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों के बीच SDRF की यह कार्रवाई केदारनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। चिरबासा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जवानों की लगातार मौजूदगी और सतर्कता से हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा कराने में मदद मिल रही है।
Tags: