हरिद्वार में अतिक्रमण पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, सड़कों से हटाए गए 15 बिजली के खंभे
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर ऊर्जा निगम ने शहर की सड़कों के किनारे वर्षों से खड़े अनुपयोगी बिजली के खंभों को हटाने का अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत भगत सिंह चौक से शंकराचार्य चौक तक करीब 15 अनुपयोगी विद्युत पोल हटाए गए हैं। प्रशासन की इस पहल से सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सुगम होने और यातायात जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा पैदल चलने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी।
जिला प्रशासन का उद्देश्य शहर के प्रमुख मार्गों पर मौजूद अनावश्यक बाधाओं को दूर करना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। हरिद्वार में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए प्रशासन लगातार अतिक्रमण हटाने और सड़कों की स्थिति सुधारने पर ध्यान दे रहा है।
भगत सिंह चौक से शंकराचार्य चौक तक कार्रवाई
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर ऊर्जा निगम की टीम ने भगत सिंह चौक से शंकराचार्य चौक के बीच अनुपयोगी बिजली के खंभों को हटाया।
इस मार्ग पर कई ऐसे विद्युत पोल मौजूद थे, जिनका वर्तमान बिजली आपूर्ति व्यवस्था में उपयोग नहीं हो रहा था।
इन खंभों के सड़क किनारे खड़े रहने से उपलब्ध स्थान प्रभावित हो रहा था।
प्रशासन ने ऐसे खंभों की पहचान कर उन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की।
अब तक लगभग 15 विद्युत पोल हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।
सड़क पर अनावश्यक बाधाओं को हटाने की पहल
हरिद्वार के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण यातायात व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सड़क किनारे मौजूद अनुपयोगी विद्युत पोल, अव्यवस्थित पार्किंग और अन्य बाधाएं वाहनों की आवाजाही प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में जिला प्रशासन ने सड़कों पर मौजूद अनावश्यक अवरोध दूर करने पर जोर दिया है।
बिजली के पुराने खंभे हटने से कुछ स्थानों पर सड़क किनारे अतिरिक्त जगह उपलब्ध हो सकती है।
इससे वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को राहत मिलने की संभावना है।
जिलाधिकारी ने दिए थे सख्त निर्देश
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित शहर की यातायात और अतिक्रमण संबंधी समस्याओं को लेकर लगातार निरीक्षण कर रहे हैं।
इससे पहले 24 सितंबर को उन्होंने भगत सिंह चौक क्षेत्र का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने चौक और आसपास मौजूद अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
इसके अलावा नगर निगम को झाड़ियों की कटाई और नालों की सफाई कराने के लिए भी कहा गया था।
जिलाधिकारी ने ज्वालापुर की ओर नाले पर स्लैब डालने के निर्देश भी दिए थे, ताकि यातायात व्यवस्था में सुधार हो सके।
बिजली के पोल हटने से कम हो सकती है जाम की समस्या
शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सुबह और शाम वाहनों का दबाव बढ़ जाता है।
ऐसे समय सड़क किनारे मौजूद बाधाओं के कारण वाहनों की गति प्रभावित हो सकती है।
विशेष रूप से संकरे स्थानों पर बड़े वाहनों को निकलने में परेशानी होती है।
अनुपयोगी विद्युत पोल हटाए जाने से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
हालांकि, इससे यातायात जाम में कितनी कमी आएगी, इसका वास्तविक आकलन अभियान पूरा होने और यातायात व्यवस्था की समीक्षा के बाद ही संभव होगा।
विद्युत आपूर्ति प्रभावित न हो, इसका ध्यान जरूरी
पुराने विद्युत पोलों को हटाते समय बिजली आपूर्ति और नागरिक सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है।
ऊर्जा निगम की तकनीकी टीम को यह सुनिश्चित करना होता है कि हटाए जाने वाले खंभों से कोई सक्रिय विद्युत लाइन जुड़ी न हो।
इसके अलावा विद्युत तारों और संबंधित उपकरणों को सुरक्षित तरीके से हटाना भी जरूरी है।
सड़क किनारे काम करते समय वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता है।
हरिद्वार में चल रही कार्रवाई के दौरान भी इन तकनीकी मानकों का पालन आवश्यक है।
अवैध केबल और तारों पर भी कार्रवाई
हरिद्वार जिला प्रशासन पहले से ही बिजली के खंभों पर अवैध तरीके से लगाए गए केबल और तारों के खिलाफ अभियान चला रहा है।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में देवपुरा चौक से रानीपुर मोड़ तक अनधिकृत केबल हटाने की कार्रवाई शुरू की गई थी।
नगर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने इस अभियान को आगे बढ़ाया।
जिलाधिकारी ने पहले संबंधित कंपनियों और केबल ऑपरेटरों को अनधिकृत तार स्वयं हटाने के निर्देश दिए थे।
निर्धारित समय के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन ने इन्हें हटाने का अभियान शुरू किया।
शहर की सुंदरता में भी होगा सुधार
अनुपयोगी विद्युत खंभों और बेतरतीब तारों के कारण कई स्थानों पर शहर की सुंदरता प्रभावित होती है।
पुराने ढांचे हटने से सड़कों के आसपास का दृश्य अधिक व्यवस्थित दिखाई दे सकता है।
हरिद्वार धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है।
यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे में शहर की स्वच्छता, सुंदरता और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
पैदल यात्रियों को मिलेगी सुविधा
सड़क किनारे खड़े अनुपयोगी खंभे कई बार पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी बाधा बनते हैं।
विशेष रूप से फुटपाथ या सड़क के संकरे हिस्सों में मौजूद खंभों के कारण लोगों को मुख्य सड़क पर चलना पड़ सकता है।
इससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
अनावश्यक अवरोध हटाए जाने से पैदल यात्रियों के लिए जगह उपलब्ध हो सकती है।
बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बाधामुक्त मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
नगर निगम और ऊर्जा निगम के बीच समन्वय
शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है।
सड़क पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
वहीं विद्युत पोलों से संबंधित तकनीकी कार्य ऊर्जा निगम के माध्यम से किए जाते हैं।
ऐसे अभियानों में संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल से काम सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है।
अन्य मार्गों पर भी कार्रवाई की जरूरत
भगत सिंह चौक से शंकराचार्य चौक तक करीब 15 अनुपयोगी विद्युत पोल हटाने की कार्रवाई के बाद शहर के अन्य व्यस्त मार्गों पर भी ऐसे अवरोधों की पहचान करना उपयोगी हो सकता है।
इसके लिए सड़कों का संयुक्त निरीक्षण कर यह निर्धारित किया जा सकता है कि कहां बिजली के पुराने खंभे यातायात को प्रभावित कर रहे हैं।
हालांकि, प्रशासन ने अन्य मार्गों पर कितने खंभे हटाने का लक्ष्य तय किया है, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
हरिद्वार को जाम मुक्त बनाने की दिशा में कदम
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को हरिद्वार की सड़क व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भगत सिंह चौक से शंकराचार्य चौक तक अनुपयोगी खंभे हटने से वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
हालांकि, शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए अवैध पार्किंग, सड़क अतिक्रमण और यातायात प्रबंधन जैसी समस्याओं पर भी लगातार काम करना होगा।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर शुरू किया गया यह अभियान सड़कों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रशासन के प्रयासों का हिस्सा है।