उत्तरकाशी। चारधाम सड़क परियोजना के तहत यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में एक बार फिर भूस्खलन की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, सुरंग के पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर अचानक मलबा गिर गया। इसके बाद सुरंग के भीतर मलबा फैल गया, जिससे निर्माण कार्य और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि, निर्माण कंपनी ने फिलहाल किसी बड़े खतरे की आशंका से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि घटना को लेकर आवश्यक सुरक्षा उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है। दूसरी ओर, सुरंग में लगातार सामने आ रही भूस्खलन की घटनाओं ने वर्ष 2023 के उस बड़े हादसे की यादें फिर ताजा कर दी हैं, जब 41 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए थे।

सुरंग के अंदर डेढ़ किलोमीटर पर गिरा मलबा

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ताजा घटना सुरंग के पोलगांव-बड़कोट छोर से लगभग 1.5 किलोमीटर अंदर हुई। भूस्खलन के बाद सुरंग के भीतर मलबा जमा हो गया।

निर्माणाधीन सुरंग में काम कर रहे कर्मचारियों और मशीनरी की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण के दौरान पहाड़ी क्षेत्र में चट्टानों और मिट्टी के खिसकने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सुरंग के भीतर मलबा गिरने की घटना को सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से लिया जा रहा है।

हालांकि, निर्माण कंपनी की ओर से फिलहाल किसी बड़े खतरे की बात से इनकार किया गया है। कंपनी का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

2023 के हादसे की याद हुई ताजा

सिलक्यारा सुरंग का नाम वर्ष 2023 के बड़े सुरंग हादसे के बाद देशभर में चर्चा में आया था। उस वर्ष सुरंग के सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर भारी भूस्खलन हुआ था।

इस हादसे के कारण निर्माण कार्य में लगे 41 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए थे। अचानक मलबा गिरने के कारण श्रमिकों का बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया था। इसके बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लंबे समय तक बचाव अभियान चलाया गया।

करीब 17 दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। उस समय सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों को बाहर निकालना देश के सबसे चुनौतीपूर्ण बचाव अभियानों में शामिल रहा था।

हादसे के बाद सुरंग निर्माण की सुरक्षा व्यवस्था, पहाड़ों की भूगर्भीय स्थिति और निर्माण तकनीक को लेकर कई सवाल उठे थे।

हादसे के बाद भी नहीं थमीं घटनाएं

2023 की घटना के बाद उम्मीद की गई थी कि सुरंग निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा तथा संभावित भूस्खलन वाले क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके बावजूद सुरंग में समय-समय पर मलबा गिरने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आने की बात कही जाती रही है।

ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या निर्माण क्षेत्र में भूगर्भीय जोखिम का पर्याप्त आकलन किया जा रहा है और क्या सुरंग के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं।

हालांकि, अभी तक ताजा घटना में किसी के घायल होने या किसी व्यक्ति के मलबे में फंसने की सूचना सामने नहीं आई है।

निर्माण कंपनी ने खतरे से किया इनकार

ताजा भूस्खलन के बाद निर्माण कंपनी की ओर से स्थिति को लेकर स्पष्ट किया गया है कि इससे किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। कंपनी का कहना है कि मलबे की स्थिति और सुरंग के भीतर की सुरक्षा का आकलन किया जा रहा है।

निर्माणाधीन सुरंग में किसी भी तरह की गतिविधि से पहले सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे मामलों में मलबा हटाने के साथ-साथ यह भी जांचना जरूरी होता है कि भूस्खलन के कारण सुरंग की संरचना पर कोई असर पड़ा है या नहीं।

चारधाम परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा

सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग चारधाम सड़क परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाना और यात्रा को अधिक सुगम बनाना है।

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सड़क और सुरंग जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को रणनीतिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।

लेकिन पहाड़ी इलाकों में निर्माण के दौरान भूस्खलन, चट्टानों के खिसकने और भूगर्भीय अस्थिरता जैसी चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं। इसलिए निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

भूगर्भीय जोखिम पर फिर चर्चा

ताजा घटना के बाद विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के बीच सुरंग क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में सुरंग निर्माण के दौरान जमीन की संरचना, चट्टानों की मजबूती और पानी के रिसाव जैसे कई कारकों पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है।

विशेष रूप से उस सुरंग में, जहां पहले भी बड़ा भूस्खलन हो चुका है, छोटी घटनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ताजा मलबा किस वजह से गिरा और क्या इसका संबंध प्राकृतिक भूगर्भीय गतिविधि से है।

श्रमिकों की सुरक्षा सबसे अहम

सुरंग निर्माण के दौरान सबसे बड़ी प्राथमिकता श्रमिकों की सुरक्षा होती है। वर्ष 2023 में 41 श्रमिकों के फंसने की घटना ने इस जोखिम को बेहद गंभीर तरीके से सामने रखा था।

उस हादसे के बाद लंबे रेस्क्यू अभियान के जरिए सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इसलिए ताजा भूस्खलन की घटना के बाद श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता स्वाभाविक है।

निर्माण कंपनी और संबंधित एजेंसियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि सुरंग के भीतर काम शुरू रखने या आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित हिस्से की पूरी तरह जांच की जाए और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

आगे की निगरानी पर रहेगी नजर

फिलहाल ताजा घटना के बाद सुरंग के भीतर जमा मलबे और प्रभावित हिस्से की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। निर्माण कंपनी ने बड़े खतरे से इनकार किया है, लेकिन 2023 की घटना की पृष्ठभूमि में सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही चिंता का कारण बन सकती है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि भूस्खलन के कारणों की जांच में क्या सामने आता है और निर्माण एजेंसियां सुरक्षा को लेकर क्या अतिरिक्त कदम उठाती हैं।

सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में एक बार फिर मलबा गिरने की घटना ने साफ कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्र में बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते समय प्राकृतिक और भूगर्भीय जोखिमों की लगातार निगरानी जरूरी है। फिलहाल किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन सुरंग की सुरक्षा और श्रमिकों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर सतर्कता बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

Tags: