हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेले की शुरुआत झमाझम बारिश के बीच हुई। सोमवार सुबह से ही मौसम ने करवट ली और करीब 11 बजे शुरू हुई तेज वर्षा दोपहर तक जारी रही। बारिश के कारण जहां श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली, वहीं निचले इलाकों में जलभराव के चलते लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा।
कांवड़ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना के बीच हुई बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की भी परीक्षा ली। शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया, जिससे पैदल चलने वाले कांवड़ यात्रियों और स्थानीय लोगों को असुविधा हुई। हालांकि प्रशासन और नगर निकाय की टीमें जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटी रहीं।
पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर गंगा नदी और उसकी सहायक धाराओं पर भी दिखाई दिया। बारिश के कारण गंगा नहर में पहाड़ी क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सिल्ट आने लगी। निर्धारित मात्रा से अधिक सिल्ट पहुंचने के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गंग नहर को बंद कर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश के दौरान नदियों में मिट्टी और गाद की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे नहरों के संचालन में परेशानी होती है। इसी को देखते हुए गंग नहर में पानी की आपूर्ति को नियंत्रित किया गया।
वहीं, भीमगोड़ा बैराज पर गंगा का जलस्तर भी बढ़ गया। नदी में पानी की तेज धार और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी करता रहा। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं से सतर्क रहने की अपील की।
दोपहर के समय हरिद्वार के खड़खड़ी क्षेत्र में सूखी नदी में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। अचानक बढ़े जलस्तर से लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। तेज बहाव के कारण कई वाहन पानी में बह गए। कुछ वाहन पानी के साथ पीछे से बहकर आते हुए भी दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के बाद सूखी नदी में अचानक पानी आने से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कई वाहन चालक अपने वाहनों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते रहे। घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी।
कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मौसम की स्थिति प्रशासन के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। बारिश से जहां तापमान में गिरावट आई और यात्रियों को राहत मिली, वहीं जलभराव और नदी के बढ़ते जलस्तर ने चुनौतियां भी खड़ी कर दीं।
प्रशासन की ओर से कांवड़ मार्गों, घाटों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें भी सक्रिय रखी गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
मौसम विभाग की ओर से पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई जाती रही है। लगातार बारिश की स्थिति में गंगा और अन्य जल स्रोतों के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की है।
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंचते हैं और पैदल अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। ऐसे में बारिश के कारण सड़क, घाट और यात्रा मार्गों की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है।
हालांकि, बारिश ने यात्रा की शुरुआत में कुछ परेशानियां जरूर पैदा कीं, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बड़ी संख्या में कांवड़िए बारिश के बीच भी अपनी यात्रा जारी रखते नजर आए।
फिलहाल हरिद्वार प्रशासन गंगा के जलस्तर, मौसम और कांवड़ मार्गों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।