देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार को लेकर एक बार फिर सियासी खींचतान तेज होती नजर आ रही है। उमेश कुमार के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने खुलकर नाराजगी जताई है। रावत का आरोप है कि जिस व्यक्ति को वह अपनी सरकार गिराने के घटनाक्रम से जोड़ते हैं, कांग्रेस के कुछ लोग उसी को अब “हीरो” बनाने में लगे हुए हैं।
कुमार विश्वास जैसे बाहरी नामों की अटकलों से अलग यह मामला उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से सीधे जुड़ा हुआ है। उमेश कुमार फिलहाल खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक हैं। हाल के दिनों में उनके कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई है। इसी बीच हरीश रावत की तीखी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि यदि पार्टी स्तर पर उमेश कुमार को लेकर कोई गंभीर पहल होती है तो उसके सामने आंतरिक विरोध की चुनौती खड़ी हो सकती है।
हरीश रावत और उमेश कुमार के बीच राजनीतिक टकराव कोई नया नहीं है। दोनों के रिश्तों में सबसे बड़ा विवाद वर्ष 2016 के उस चर्चित स्टिंग प्रकरण के बाद सामने आया था, जब रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे और उमेश कुमार पत्रकारिता से जुड़े हुए थे। उस दौर का राजनीतिक संकट उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। रावत आज भी उस घटनाक्रम को अपनी सरकार के खिलाफ साजिश और सत्ता से हटाने की कोशिश के रूप में देखते हैं।
रावत ने हालिया प्रतिक्रिया में कहा कि जिन्होंने सरकार बचाने के लिए संघर्ष किया, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि जिस व्यक्ति को वह कांग्रेस सरकार की विदाई के लिए जिम्मेदार मानते हैं, उसे पार्टी के कुछ लोग आगे बढ़ाने में लगे हैं। यह रावत का राजनीतिक आरोप है और इसे उनके पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उमेश कुमार की संभावित कांग्रेस एंट्री पर पार्टी ने अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं की सक्रियता और रणनीतियों को लेकर मतभेद भी सामने आ चुके हैं। हाल के दिनों में हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा को लेकर भी प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच असहमति की खबरें सामने आई थीं। कांग्रेस नेतृत्व ने सामूहिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक समन्वय पर जोर दिया है।
उमेश कुमार का मामला खास तौर पर खानपुर सीट की राजनीति से भी जुड़ गया है। हरीश रावत ने हाल में खानपुर क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। यदि रावत इस सीट से चुनावी मैदान में उतरते हैं तो उमेश कुमार की राजनीतिक भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यही वजह है कि उमेश की संभावित कांग्रेस एंट्री की चर्चा को केवल पार्टी सदस्यता तक सीमित न मानकर आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तराखंड कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, मौजूदा विधायकों और संभावित नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की है। एक तरफ पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण तलाश रही है, वहीं दूसरी ओर पुराने राजनीतिक विवाद भी बार-बार सामने आ रहे हैं। उमेश कुमार को लेकर उठी बहस इसी चुनौती का नया उदाहरण बनती दिख रही है।
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में से हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उमेश कुमार को लेकर उनका खुला विरोध पार्टी नेतृत्व के लिए नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। यदि कांग्रेस वास्तव में उमेश को पार्टी में शामिल करने पर विचार करती है तो उसे रावत समेत उन नेताओं की नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है, जो 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम को अब भी गंभीर मुद्दा मानते हैं।
वहीं दूसरी तरफ उमेश कुमार का अपना राजनीतिक आधार है। वह खानपुर से निर्दलीय विधायक के रूप में चुने गए और क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। इसलिए उनके किसी प्रमुख राजनीतिक दल में शामिल होने की संभावना स्वाभाविक रूप से चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अब तक उनकी कांग्रेस सदस्यता को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
इस पूरे विवाद ने उत्तराखंड कांग्रेस में पहले से मौजूद आंतरिक मतभेदों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हाल में हरीश रावत की राजनीतिक गतिविधियों और यात्रा कार्यक्रम को लेकर पार्टी हाईकमान की नाराजगी भी सामने आई थी। इससे संकेत मिलता है कि विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस नेतृत्व संगठन में एकजुटता और अनुशासन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व उमेश कुमार को लेकर क्या रुख अपनाता है। यदि उनकी पार्टी में एंट्री की अटकलें आगे बढ़ती हैं तो यह मामला केवल एक विधायक की सदस्यता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरीश रावत और पार्टी के दूसरे नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बन रहे राजनीतिक माहौल के बीच यह विवाद कांग्रेस के लिए नई परीक्षा बन सकता है। एक ओर पार्टी को चुनावी मजबूती के लिए नए चेहरों और प्रभावशाली नेताओं को साथ लाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर पुराने नेताओं की आपत्तियों और ऐतिहासिक राजनीतिक विवादों को भी संभालना होगा। फिलहाल उमेश कुमार की कांग्रेस में संभावित एंट्री पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन हरीश रावत की नाराजगी ने इस मुद्दे को राज्य की राजनीति के केंद्र में जरूर ला दिया है।