Haridwar: प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारियों को दिया जा रहा अंतिम रूप
विद्वत परंपरा के सम्मेलन की तैयारियों में जुटे आयोजक
हरिद्वार : पतंजलि विश्वविद्यालय में आगामी 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन 29 से 31 अक्टूबर तक पतंजलि विश्वविद्यालय में किया जाएगा। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय “योग, आयुर्वेद एवं अन्य प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां” निर्धारित किया गया है।
बैठक में सम्मेलन को व्यवस्थित और सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन कर प्रभारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं और पहले से गठित समितियों के कार्यों की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार पुनर्वितरण किया गया।
सम्मेलन में योग, आयुर्वेद, भारतीय चिकित्सा पद्धति, आध्यात्मिक आयाम, वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, योग मनोविज्ञान और समेकित चिकित्सा जैसे विषयों पर देश-विदेश के विद्वानों और शोधार्थियों द्वारा मंथन किया जाएगा। विद्वानों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की स्थापना वर्ष 1919 में हुई थी। एक शताब्दी से अधिक समय से यह मंच भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति, साहित्य, भाषाओं, इतिहास और प्राच्यविद्याओं के अध्ययन से जुड़े विद्वानों को एक साथ लाने का कार्य कर रहा है।
बैठक में पंजीकरण, अतिथि सत्कार, आवास-भोजन, परिवहन, तकनीकी प्रबंधन, शोध-पत्र एवं सत्र संचालन, प्रचार-प्रसार, मीडिया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
बैठक में प्रति-कुलपति साध्वी देवप्रिया, क्रय समिति अध्यक्षा अंशुल, संप्रेषण प्रमुख पारूल, वित्त अधिकारी सीए ऋचा भगत, संकायाध्यक्ष प्रो. मयंक अग्रवाल सहित कुलसचिव, उपकुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, अधिष्ठातागण, विभागाध्यक्ष और छात्र प्रतिनिधि उपस्थित रहे।