Haridwar: मानसून की देरी से हरिद्वार में जल संकट गहराया, भूजल स्तर नीचे

हरिद्वार में पानी की कमी बढ़ी, भूजल स्तर में आई गिरावट

Update: 2026-07-01 07:55 GMT

हरिद्वार: मानसून की सुस्त रफ्तार और लगातार पड़ रही भीषण गर्मी से हरिद्वार में भूजल का स्तर काफी प्रभावित हुआ है। शहरी क्षेत्र के जलकूपों में जहां भूजल स्तर करीब 10 फीट नीचे गया है, वही ग्रामीण क्षेत्रों में यह 25 फीट तक नीचे घट गया है।

देहात के कई इलाकों में जलस्तर नीचे खिसकने से हैंडपंप सूखने लगे हैं। जलस्तर गिरने का असर पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ खेती-किसानी पर भी पड़ने लगा है। बिजली कटौती ने जलापूर्ति की समस्या को और गंभीर बना दिया है।

जिले में बढ़ते तापमान और मानसून ना आने के कारण भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।शहर में हरिद्वार, कनखल और ज्वालापुर क्षेत्र के विभिन्न जलकूपों में भूजल स्तर करीब तीन मीटर (लगभग 10 फुट) तक नीचे चला गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्तर करीब 25 फुट तक नीचे पहुंचने से कई हैंडपंप सूख चुके हैं। कम वर्षा, लगातार बढ़ती गर्मी और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

उत्तराखंड जल संस्थान हरिद्वार के अधिशासी अभियंता विपिन चौहान के अनुसार शहर में भूजल स्तर घटने के बावजूद फिलहाल पेयजल आपूर्ति पर सीधा असर नहीं पड़ा है, क्योंकि जलकूप अभी भी पर्याप्त मात्रा में पानी दे रहे हैं। हालांकि बिजली कटौती के चलते कई ओवरहेड टैंकों में समय पर पानी स्टोर नहीं हो पा रहा है। नतीजतन शहर के कई इलाकों में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

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