Gurugram: डीएलएफ और बसई में मॉक ड्रिल से परखी गई तैयारी

"सिग्नेचर टावर अंडरपास में राहत अभ्यास"

Update: 2026-05-15 06:32 GMT

गुरुग्राम: गुरुवार सुबह नौ बजे गुरुग्राम में बाढ़ आपदा को लेकर मॉक एक्सरसाइज आयोजित की गई। लघु सचिवालय परिसर में सायरन बजते ही प्रशासनिक तंत्र तुरंत अलर्ट मोड में आ गया। सूचना मिलते ही इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर सक्रिय किया गया और राहत एवं बचाव टीमों ने तय स्थानों पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया। कंट्रोल रूम से विभिन्न विभागों की गतिविधियों की निगरानी शुरू हुई। आपदा प्रबंधन को लेकर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित बाढ़ जैसी स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की तैयारी, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं डीसी उत्तम सिंह के मार्गदर्शन में मॉक एक्सरसाइज के दौरान इमरजेंसी ऑपरेशन सिस्टम (ईओसी) से सीटीएम ज्योति नागपाल और डीआरओ, विजय यादव और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से पूनम ने पूरे अभियान की मॉनिटरिंग की। अभ्यास की लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई, जबकि सेना की टीम ने संपूर्ण गतिविधियों का सुपरविजन किया। जिला प्रशासन, राजस्व एवं प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सिविल डिफेंस, एनडीआरएफ, पुलिस, फायर ब्रिगेड, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया।

बसई तालाब में हुआ लाइव रेस्क्यू अभ्यास

अभ्यास के तहत भारी बारिश और जलभराव की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। डीएलएफ फेज-1 अंडरपास और सिग्नेचर टावर अंडरपास को संभावित प्रभावित स्थल के रूप में शामिल किया गया, जबकि वास्तविक रेस्क्यू और राहत गतिविधियों का संचालन बसई पोंड क्षेत्र में किया गया। जलभराव की स्थिति को प्रभावी ढंग से दर्शाने और राहत एजेंसियों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक परीक्षण करने के उद्देश्य से विभिन्न रेस्क्यू गतिविधियां वहां आयोजित की गईं।

मॉक सीनारियो में 23 घायलों का किया गया रेस्क्यू

मॉक सीनारियो के अनुसार कुल 23 घायलों को रेस्क्यू किया गया। जलमग्न अंडरपासों में वाहन फंसने से डूबने की घटनाओं में 8 लोगों की मृत्यु दर्शाई गई, जबकि बाढ़ के पानी में फैले करंट और खुले बिजली के तारों की चपेट में आने से 7 लोगों की मौत दिखाई गई। इसके अतिरिक्त सडक़ दुर्घटनाओं और अन्य आघात संबंधी घटनाओं में भी कई लोग घायल हुए। सांप के काटने सहित विभिन्न आपात चिकित्सा स्थितियों को भी अभ्यास में शामिल किया गया, ताकि मेडिकल टीमों की तत्परता का परीक्षण किया जा सके।

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