नैनीताल। उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल में मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को सर्बजनिन दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से आयोजित 70वें दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मां दुर्गा के जयकारों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन से शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा में कुमाऊंनी और बंगाली संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर मां दुर्गा की विदाई यात्रा में भाग लिया। मल्लीताल स्थित नयना देवी मंदिर परिसर में स्थापित दुर्गा मंडप के समीप महादशमी पूजा से धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। इसके बाद दर्पण विसर्जन और देवी वरण की रस्में संपन्न की गईं। पांच दिनों तक चले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के बाद देर शाम नैनी झील में देवी प्रतिमा के विसर्जन का कार्यक्रम निर्धारित है। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि और अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना की।
महादशमी पूजा से हुई अंतिम दिन की शुरुआत
नैनीताल के नयना देवी मंदिर परिसर में मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन महादशमी की विशेष पूजा आयोजित की गई। इस दौरान पुजारियों ने पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ मां दुर्गा की आराधना की।
श्रद्धालुओं ने देवी को पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
इसके बाद दर्पण विसर्जन और देवी वरण की रस्में निभाई गईं। बंगाली दुर्गा पूजा परंपरा में इन अनुष्ठानों का विशेष महत्व है।
देवी वरण के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा को भावभीनी विदाई देते हैं।
जयकारों के बीच निकली भव्य शोभायात्रा
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद देवी प्रतिमा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिला श्रद्धालु, युवा और पूजा समिति के सदस्य शामिल हुए।
इस दौरान मां दुर्गा के जयकारों से आसपास का वातावरण गूंज उठा।
पारंपरिक वाद्ययंत्रों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु मां की प्रतिमा के साथ आगे बढ़ते दिखाई दिए।
शहर में निकली शोभायात्रा ने स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों का ध्यान भी आकर्षित किया।
श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ माता की विदाई को लेकर भावुकता भी दिखाई दी।
कुमाऊंनी और बंगाली संस्कृति का संगम
नैनीताल का दुर्गा पूजा महोत्सव अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए विशेष पहचान रखता है।
यहां आयोजित कार्यक्रमों में बंगाली धार्मिक परंपराओं के साथ कुमाऊं की लोक संस्कृति भी देखने को मिलती है।
इस वर्ष भी शोभायात्रा में दोनों संस्कृतियों की झलक दिखाई दी।
पारंपरिक परिधान, संगीत और स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे।
नैनीताल में वर्षों से रहने वाले बंगाली समुदाय और स्थानीय कुमाऊंनी समाज की संयुक्त भागीदारी इस महोत्सव की विशेषता है।
यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देता है।
नैनी झील में प्रतिमा विसर्जन की तैयारी
महोत्सव के समापन पर मंगलवार देर शाम नैनी झील में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन प्रस्तावित है।
इससे पहले देवी की प्रतिमा को शोभायात्रा के माध्यम से नगर भ्रमण कराया गया।
पूजा समिति की ओर से विसर्जन कार्यक्रम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
नैनी झील शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में यहां होने वाला प्रतिमा विसर्जन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
मां दुर्गा की विदाई के साथ पांच दिवसीय महोत्सव का औपचारिक समापन होगा।
16 अक्टूबर को कलश यात्रा से हुआ था शुभारंभ
सर्बजनिन दुर्गा पूजा कमेटी के 70वें महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार, 16 अक्टूबर को भव्य कलश यात्रा के साथ हुई थी।
नयना देवी मंदिर परिसर से निकली कलश यात्रा में पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने भाग लिया था।
इसके साथ स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक झांकियां और बैंड-बाजों के साथ शोभायात्रा भी निकाली गई थी।
कलश यात्रा नयना देवी मंदिर से पंत पार्क, रिक्शा स्टैंड और खड़ी बाजार होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुंची थी।
इसके बाद शाम को मां दुर्गा की प्रतिमा की विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
पांच दिवसीय आयोजन में पूजा-अर्चना, देवी भोग, संध्या आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
महाअष्टमी पर हुआ था भव्य दीपदान
महोत्सव के दौरान रविवार, 18 अक्टूबर को महाअष्टमी के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए थे।
सुबह पुष्पांजलि पूजा आयोजित की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
दोपहर में देवी को भोग अर्पित किया गया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।
शाम को विशेष आरती के बाद नैनी झील में दीपदान किया गया।
झील के पानी में तैरते दीपकों का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
महोत्सव के अंतर्गत डीएसए मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया उत्साह
दुर्गा पूजा महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा।
इसके तहत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया।
डीएसए मैदान में स्कूली बच्चों और विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।
लोकगीत, नृत्य और भक्ति संगीत के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया गया।
महाअष्टमी की स्टार नाइट में लोकगायक राकेश खनवाल और मेघना चंद्रा ने कुमाऊंनी गीत प्रस्तुत किए।
इन कार्यक्रमों ने नैनीताल की लोक संस्कृति को मंच प्रदान किया और पर्यटकों को भी स्थानीय परंपराओं से परिचित कराया।
पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं का किया गया निर्माण
इस वर्ष दुर्गा पूजा महोत्सव के लिए पर्यावरण अनुकूल सामग्री से प्रतिमाएं तैयार की गई थीं।
मूर्ति निर्माण का कार्य मंदिर परिसर में ही किया गया था।
पूजा समिति के अनुसार, प्रतिमाओं को तैयार करने में पारंपरिक निर्माण विधियों का इस्तेमाल किया गया।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को ध्यान में रखते हुए प्रतिमाओं का निर्माण किया गया।
नैनीताल जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण का महत्व और बढ़ जाता है।
विशेष रूप से झीलों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।
70 वर्षों से जारी है धार्मिक परंपरा
नैनीताल में सर्बजनिन दुर्गा पूजा महोत्सव का यह 70वां आयोजन है।
लंबे समय से यह महोत्सव शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
इस आयोजन में स्थानीय नागरिकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी भाग लेते हैं।
पूजा समिति के पदाधिकारी और सदस्य हर वर्ष कार्यक्रमों की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस बार भी महोत्सव को भव्य बनाने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया था।
पूजा समिति ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
सर्बजनिन दुर्गा पूजा कमेटी के पदाधिकारियों ने पूरे महोत्सव के दौरान व्यवस्थाएं संभालीं।
कमेटी के उपाध्यक्ष त्रिभुवन फर्त्याल और महासचिव उमेश मिश्रा सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन की तैयारियों में सहयोग किया।
धार्मिक पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोभायात्रा के संचालन में समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इसके अलावा विभिन्न स्थानीय संगठनों और श्रद्धालुओं ने भी आयोजन में सहभागिता की।
पांच दिनों तक चले कार्यक्रमों में धार्मिक आस्था के साथ सामूहिक सहयोग की भावना दिखाई दी।
माता की विदाई पर भावुक हुए श्रद्धालु
मंगलवार को महादशमी पूजा और देवी वरण के दौरान श्रद्धालुओं में भावुकता देखने को मिली।
देवी की विदाई को लेकर श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से मां दुर्गा के आगमन की कामना की।
बंगाली परंपरा में विजयादशमी का अवसर देवी दुर्गा की अपने मायके से विदाई के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है।
श्रद्धालु इस अवसर पर मां से परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
शोभायात्रा में भी इसी आस्था और भावनात्मक जुड़ाव की झलक दिखाई दी।
भक्ति और संस्कृति के साथ महोत्सव का समापन
नैनीताल में 70वें दुर्गा पूजा महोत्सव का अंतिम दिन धार्मिक अनुष्ठानों, भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक उत्साह के नाम रहा।
नयना देवी मंदिर परिसर में महादशमी पूजा, दर्पण विसर्जन और देवी वरण की रस्मों के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को नगर भ्रमण के लिए ले जाया गया।
कुमाऊंनी और बंगाली संस्कृति के संगम ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।
देर शाम निर्धारित प्रतिमा विसर्जन के साथ महोत्सव के समापन की तैयारी है।
श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को भावभीनी विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर से इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ महोत्सव मनाने की कामना की।