Gopeshwar: 2017 से भाजपा का दबदबा कायम, कांग्रेस को सत्ता वापसी के लिए करनी होगी मशक्कत
भाजपा के दबदबे के बीच कांग्रेस की अग्निपरीक्षा, सत्ता वापसी की चुनौती
गोपेश्वर: राज्य गठन के बाद उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता का बदलाव देखने को मिलता रहा। दोनों दल बारी-बारी से सरकार बनाते रहे, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद यह राजनीतिक परंपरा बदल गई। भाजपा लगातार सत्ता में बनी हुई है और अब 2027 के चुनाव में पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दावा कर रही है।
2017 में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता हासिल की थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने सत्ता विरोधी रुझान को मात देते हुए सरकार बरकरार रखी। इस तरह करीब एक दशक से उत्तराखंड की सत्ता भाजपा के हाथ में है। भाजपा अब इसी निरंतरता को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करते हुए 2027 में हैट्रिक की तैयारी कर रही है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और संगठन की मजबूती के आधार पर जनता एक बार फिर भाजपा को मौका देगी।
वहीं कांग्रेस के सामने भाजपा के इस लगातार दबदबे को तोड़ने की चुनौती है। कांग्रेस सत्ता में वापसी का दावा कर रही है और सरकार के खिलाफ उठ रहे स्थानीय मुद्दों, बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और विकास से जुड़े सवालों को चुनावी हथियार बनाने की तैयारी में है।
उत्तराखंड की राजनीति की तुलना अक्सर पड़ोसी हिमाचल प्रदेश से भी की जाती है, जहां अब तक भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता परिवर्तन का सिलसिला देखने को मिलता रहा है। इसके उलट उत्तराखंड में 2017 के बाद लगातार दो विधानसभा चुनावों में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ।
यही स्थिति 2027 के चुनाव को खास बना रही है। भाजपा लगातार तीसरी जीत के लिए मैदान में है तो कांग्रेस सत्ता परिवर्तन की उम्मीद लगाए बैठी है। इसके अलावा क्षेत्रीय दलों और नए राजनीतिक समीकरणों की सक्रियता भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड 2017 के बाद बनी भाजपा की सत्ता निरंतरता को आगे बढ़ाएगा या एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की परंपरा लौटेगी। 2027 का चुनाव इसी सवाल का जवाब तय करेगा।