मदरसों की मान्यता के प्रकरणों में तेजी लाने पर जोर, अध्यक्ष ने दिए निर्देश
बिना पंजीकरण चल रहे मदरसों पर कार्रवाई
रुद्रपुर: ऊधमसिंह नगर जिले में बिना पंजीकरण और शिक्षा विभाग की मान्यता के संचालित मिले 10 मदरसों को सील किया गया है। इन मदरसों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की गई है। शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर मान्यता संबंधी लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने प्रस्तावों में सामने आ रही कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। बैठक में मदरसों के पंजीकरण और मान्यता से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। अध्यक्ष ने लंबित प्रकरणों और प्रस्तावों में मौजूद कमियों को दूर करने पर जोर दिया। इस निर्देश का केंद्र उन मामलों को आगे बढ़ाना रहा, जिनमें आवश्यक सुधार नहीं होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। संबंधित अधिकारियों को इन कमियों पर ध्यान देकर प्रकरणों के निस्तारण की दिशा में काम करने के लिए कहा गया।
जिले में जिन 10 मदरसों को सील किया गया है, वे बिना पंजीकरण और शिक्षा विभाग की मान्यता के संचालित मिले थे। कार्रवाई के बाद अब उनकी मौजूदा स्थिति का विस्तृत विवरण मांगा गया है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में सील किए गए मदरसों के नाम, स्थान और प्रत्येक संस्थान पर कार्रवाई की अलग-अलग तारीख का उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट सामने आने पर इन संस्थानों की स्थिति को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
सील मदरसों की मौजूदा स्थिति पर नजर
सीलिंग के बाद वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मांगा जाना इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम है। इससे कार्रवाई के बाद की परिस्थितियों का विवरण संबंधित स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा। फिलहाल रिपोर्ट तलब किए जाने की जानकारी दी गई है। उसमें क्या तथ्य सामने आए हैं अथवा उसके आधार पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए सील किए गए मदरसों को लेकर किसी नई कार्रवाई, स्थायी बंदी या दोबारा संचालन की अनुमति का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मौजूदा जानकारी सीलिंग और वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मांगे जाने तक सीमित है। आगे की स्थिति रिपोर्ट और संबंधित निर्णयों से स्पष्ट होगी।
लंबित मान्यता प्रकरणों पर हुई चर्चा
बैठक में कार्रवाई के साथ मान्यता संबंधी लंबित प्रकरणों पर भी ध्यान दिया गया। अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी ने प्रस्तावों में आ रही कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। इससे स्पष्ट है कि समीक्षा में केवल सील मदरसों की स्थिति ही नहीं, बल्कि मान्यता प्रक्रिया से जुड़े अधूरे मामलों को भी स्थान दिया गया। मान्यता के लिए लंबित किसी प्रस्ताव में कमी होना और बिना मान्यता किसी संस्थान का संचालन होना अलग-अलग स्थितियां हैं। इसलिए प्रत्येक मामले की स्थिति उसके अभिलेखों और संबंधित निर्णय के आधार पर ही स्पष्ट होगी। उपलब्ध विवरण में यह नहीं बताया गया है कि सील किए गए 10 मदरसों में से कितनों के मान्यता प्रस्ताव लंबित हैं।
प्रस्तावों की कमियां दूर करने पर जोर
मान्यता प्रक्रिया में किसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए उसमें सामने आई कमियों का समाधान महत्वपूर्ण होता है। बैठक में इसी पहलू पर अधिकारियों का ध्यान दिलाया गया। हालांकि प्रस्तावों में किस प्रकार की कमियां हैं और उन्हें दूर करने के लिए कोई समयसीमा तय की गई है या नहीं, इसका विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में अध्यक्ष के निर्देशों को सभी लंबित संस्थानों को मान्यता मिल जाने की घोषणा नहीं माना जा सकता। अभी निर्देश कमियां दूर करने के हैं। प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय की जानकारी अलग से सामने आने पर ही संबंधित संस्थानों की मान्यता की स्थिति स्पष्ट होगी।
विस्तृत रिपोर्ट से स्पष्ट होगी आगे की स्थिति
सीलिंग और मान्यता संबंधी समीक्षा के बीच संस्थानवार स्पष्ट जानकारी की अहमियत बढ़ गई है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सा मामला किस स्तर पर लंबित है और किन प्रस्तावों में सुधार अपेक्षित है। फिलहाल बैठक का प्रमुख संदेश लंबित प्रकरणों पर ध्यान देने और प्रस्तावों की कमियों को दूर करने का है। जिले में 10 मदरसों को सील किए जाने के बाद अब नजर मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट पर है। साथ ही, मान्यता संबंधी लंबित मामलों में अधिकारियों की अगली कार्रवाई से प्रक्रिया की प्रगति का पता चलेगा। अध्यक्ष के निर्देशों के बाद इन दोनों विषयों—सील मदरसों की वर्तमान स्थिति और अधूरे मान्यता प्रस्तावों—पर आगे का विवरण महत्वपूर्ण होगा।